Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

लिम्बू : कला, साहित्य (भाग चार)डॉ० शोभा लिम्बू यल्मो

लिम्बू : कला, साहित्य (भाग चार)डॉ० शोभा लिम्बू यल्मो

लिम्बू समुदाय में लोकगीत /लोकनृत्य व्यक्ति विशेष के मन के अंदर छिपे हुए सुख-दुख, हर्षोल्लास, शोक विस्मय आदि अनुभूतियों को अभिव्यक्त करने का एक माध्यम मात्र हैं।

संगीत कला:

लिम्बू समुदाय में लोकगीत /लोकनृत्य व्यक्ति विशेष के मन के अंदर छिपे हुए सुख-दुख, हर्षोल्लास, शोक विस्मय आदि अनुभूतियों को अभिव्यक्त करने का एक माध्यम मात्र हैं।
लिम्बू संगीतकला में संगीत वाद्य वादन का भी एक बहुत ही रोचकपूर्ण वर्णन मुन्धुम में है। सबसे प्रथम वाद्य वादन सावा युकफुङ केम्बा के पुत्रों ने जिनमें साम्दाङ खेवा और लिङदाङ खेवा ने बनाया था जिसका मुन्धुम में उल्लेख है। उनलोगों ने अपनई बहन के लिए बाँस से एक कंघी (सिमिक्लापरि) और सुनाखरी ( फूल) के पत्तों से एक थैला और उनके भाई सुत्सुरु सुहाङ फेबा को बाँस से 'बिनायो' (सिमक्ला कोम) बनाकर उन्हें भेंट किया था।
'च्याब्रुङ ' भी लिम्बू का प्रमुख वाद्य यंत्र है। केसाप्मी नामसाप्मी नामक एक व्यक्ति ने अपने भाई नरसिंह को मारकर उसके शरीर के चमड़े से च्याब्रुङ (के) वाद्य यंत्र बनाया था (मुन्धुम आधारित)।
इस तरह लिम्बुओं का मुन्धुम में वर्णित विभिन्न लोककथाओं में विविध वाद्य यंत्रों का उल्लेख पाया जाता है।
भारतीय और पाश्चात्य वाद्य यंत्रों की तुलना में तो लिम्बुओं के पारम्परिक संगीत वाद्य वादन को निम्नलिखित वर्गो में वर्गीकृत किया गया है:
1. तालवाद्य > च्याब्रुङ (होङसिंङ), नगरा(दुन्दुभी)।
2.घन अथवा ठोस वाद्ययंत्र > काँसे की थाली (चेत्थ्या), घंटी (पोंधे), करताल (सोयेङ), बिनायो (कोम), तेत्लाफेक्ला,
3. वायु की सहायता से बजने वाले वाद्य यंत्र > मुरलीधर / बाँसुरी (मेफ्रामा)।
4. तार से बँधा हुआ वाद्य यंत्र > एकतारा (तुङगेबा), टुङना- सारंगी (उङदुङ), यालम्बर बाजा(ढोलक)।
संगीत कला में इन वाद्य यंत्रों की अहम भूमिका होने के साथ-साथ एक समृद्ध परम्परा को लिए हुए लोकगीत भी उनकी सामाजिक घटनाओं को अभिव्यक्त करने का एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण माध्यम है। इन लोकगीतों के माध्यम से हम उनके विविध अवसरों, घटनाओं और भावनाओं को आसानी से समझ सकते हैं।
लिम्बू समुदाय मृतकोण की अन्तयेष्टि के समय या किसी दुखद घटना के समय गीत नहीं गाते हैं। इनके लोकगीत को विविध समूहों में वर्गीकृत किया गया है :
1.सम्वाद गीत (ख्याली)
2.हाक्पारे साम्लो: युवक- युवतियाँ के गाने वाले गीत
3. निसाम्माङ सेवा साम्लो: (धर्मानुष्ठान में गाए जाने वाले गीत)
4. के साम्लो: च्याब्रुङ वाद्य यंत्र के साथ गाए जाने वाला गीत हैं। यह विवाह और किसी भी शुभ अवसर में गाया जाता है।

लोकनृत्य

लिम्बू अपने लोक संगीत और लोकनृत्य वाद्य यंत्रों के तालमेल के साथ सामूहिक रुप में गाते हुए नृत्य करते हैं।
इनके संगीत कला में मुख्य रुप से निम्न लोकगीत /लोकनृत्य प्रचलित हैं:-
क. पालाम साम्लो( गीत): धान रोपने और कटनी के समय गाये जाने वाले गीत / नृत्य हैं। यह साम्लो ताल, लय, शब्द और छंद अनुसार गाया जाता है।
ख. केङजोरी साम्लो:
ग. चिराक ला-क साम्लो : धान को पैर से कुचलते समय गाने जाने वाले गीत हैं। इसमें मुख्यतः पुरुष लोग भाग लेते हैं।
घ. मेक्काम साम्लो: विवाह लगन के समय गाने वाले गीत हैं।
ड़. खोई-खोई साम्लो: बच्चों को सुलाते समय गाने वाले लोरी गीत हैं।
च. ताम्के साम्लो: मकई को गोड़ते समय गाने वाले गीत हैं।
छ. तुम्याहाङ साम्लो: सभी अनुष्ठान में गाये जाते हैं।
ज. हाक्पारे साम्लो: करुण और मार्मिक गीत हैं।
झ. ख्याली साम्लो: हाज़िर-जवाब गीत हैं।
लोकनृत्य की शुरुआत मानव के आरम्भिक काल से ही व्यवहारिक रूप में विद्यमान होते आ रहा हैं। किसी भी तरह की ख़ुशी या आनंद को अभिव्यक्त करने का एक ज़रिया है।
नृत्य लिम्बुओं के जीवन का एक अभिन्न अंग है। उनके पारम्परिक सामाजिक, धार्मिक विभिन्न अवसरों में नृत्य के साथ उनका गहरा सम्बंध है।
मुन्धुम अनुसार तो प्रथम मानव लोदेन हाङ और फुङदेन हाङ थे जिन्होंने प्रथम नृत्य (के लाङ) प्रस्तुत किया था।
लिम्बू लोकनृत्य निम्नलिखित हैं:
1. के लाङ नृत्य
2. कृषि नृत्य: दाम्के लाङ, ये आलाङमा
3. युद्ध नृत्य (नाहाङमा)
4. पौराणिक नृत्य: याग्गाङसिङ लाङ, फुङसोक लाङ, तःओङसिङ लाङ

0 Total Review

Leave Your Review Here

रचनाकार परिचय

शोभा लिम्बू यल्मो

ईमेल : sovalimbooyolmo@gmail.com

निवास : कालिम्पोंग(पश्चिम बंगाल)

नाम- डॉ० शोभा लिम्बू यल्मो
जन्मतिथि- 01 जुलाई, 1967
जन्मस्थान- दुर्गापुर, पश्चिम बंगाल,
शिक्षा- एम.ए., पीएचडी.,
संप्रति- एशोसिएट प्रोफेसर, हिंदी विभाग (विभागाध्यक्ष), कालिम्पोंग कालेज , कालिम्पोंग, पश्चिम बंगाल
प्रकाशित कृति-
क. लिम्बू भाषा का स्वरुप विकास (विचार प्रकाशन, सिक्किम,2008)
ख. ‌‌'समकालीन चर्चित नेपाली कहानियां '( सूत्रधार प्रकाशन, कोलकाता (2016)
ग. 'प्रसाद की कहानियों का शास्त्रीय अध्ययन '(आनंद प्रकाशन, कोलकाता 2020)
घ. 'याक्थुंग मुक खेदा ' लिम्बू लोक-कथा हिंदी में (बुकांट पब्लिकेशन, सालबारी, सिलिगुड़ी 2023)
ड़. 'कैमेलिया '(कहानी संग्रह), अनंग प्रकाशन, नई दिल्ली।

आलेख, कहानी, कविता, साक्षात्कार एवं समीक्षात्मक लेख प्रकाशित विविध राष्ट्रीय पत्रिकाओं में:
१. समकालीन भारतीय साहित्य, साहित्य अकादमी दिल्ली,
२. युद्धरत आम आदमी पत्रिका,नई दिल्ली,
३. 'भाषा' पत्रिका, मानव संसाधन विकास मंत्रालय,नई दिल्ली।
एवं अन्य नेपाली एवं लिम्बू भाषा साहित्य पत्रिकाओं में... ।

विशेष- अध्यक्ष: दार्जिलिंग हिंदी भाषा मंच कालिम्पोंग, पश्चिम बंगाल।
सम्मान-
1- वीरांगना सावित्री बाई फुले राष्ट्रीय पुरस्कार 2016 (भारतीय साहित्य अकादमी, नई दिल्ली)
2- अंतरराष्ट्रीय तथागत विशिष्ट सम्मान 2019 (इटवा सिद्धार्थ नगर, उतर प्रदेश)
सम्पर्क- ठेगाना- ' यल्मो अयन,'
डॉ० बी.एल. दीक्षित रोड, कालिम्पोंग-734301