Ira Web Patrika
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कानपुर का नव जागरण भाग नौ- पं० लक्ष्मीकांत त्रिपाठी

6 अप्रैल 1919 को कानपुर में ऐसी विकट राजनैतिक हड़ताल हुई कि नगर में इक्के तांगे तक बंद थे। 13 अप्रैल 1919 को जलियावाला काण्ड ने सम्पूर्ण नगर में प्रतिशोध की ज्वाला सुलगा दी थी। आन्दोलनों के समय कानपुर के दोनों प्रतिद्वंदी दलों में होड़ अच्छी चलती थी।

कानपुर का नवजागरण भाग आठ- प० लक्ष्मीकांत त्रिपाठी

लखनऊ अधिवेशन से लौटते हुए भारतीय क्रान्ति के ज्वालामुखी, महान देशभक्त, उद्भट विद्वान महाराज तिलक का कानपुर में ऐतिहासिक आगमन हुआ। कानपुर के लिए लज्जा और कलंक की बात है कि स्टेशन पर गणेश जी, अरोड़ा जी के अतिरिक्त और कोई उन्हें लेने नहीं गया था।

कानपुर का नवजागरण भाग सात- प० लक्ष्मीकांत त्रिपाठी

कानपुर में सन् 1914 में प्रथम छात्र आन्दोलन राजकीय स्कूल के हेडमास्टर जे.एम. होल्ट के विरुद्ध हुआ था। कारण यह था कि परेड में उन दिनों पानी की टंकी बन रही थी, और स्कूल के लड़के मध्यावकाश में उसे देखने गए और वहाँ वे मिस्त्रियों से किसी बात पर लड़ बैठे, और अच्छी मारपीट हुई।

कानपुर का नवजागरण भाग छह- प० लक्ष्मीकांत त्रिपाठी

सन् 1913 मे बाबू नारायण प्रसाद अरोड़ा, प० शिवनारायण मिश्र वैद्य तथा प० यशोदानन्दन शुक्ल ने मिलकर साप्ताहिक प्रताप का प्रकाशन प्रारम्भ किया। श्री गणेशशंकर विद्यार्थी उन दिनो मालवीय जी द्वारा संचालित साप्ताहिक अभ्युदय के सम्पादक थे। वे सहर्ष 'प्रताप' के सम्पादक होकर कानपुर आ गए।