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कानपुर का नवजागरण (भाग- दस)- पं० लक्ष्मीकांत त्रिपाठी

सन् 1921 में "प्रताप" ने रायबरेली के ताल्लुकेदार सरदार वीरपाल सिंह के अत्याचारों का विवरण, शर्मा जी के इस शीर्षक के साथ छपा था,क्या सूबे मे आग लगाने का इरादा है?"

कानपुर का नव जागरण भाग दस- पं० लक्ष्मीकांत त्रिपाठी

सन् 1921में गाँधी जी के आवाहन पर असहयोग की बलिवेदी पर कानपुर ने अपनी पूरी भेंट चढ़ाई। ख़िलाफत आन्दोलन को गाँधी जी का वरदहस्त प्राप्त होने के कारण नगर के मुसलमानों ने भी हिन्दुओं से कंधा से कंधा भिड़ाकर कांग्रेस का साथ दिया।

कानपुर का नव जागरण भाग नौ- पं० लक्ष्मीकांत त्रिपाठी

6 अप्रैल 1919 को कानपुर में ऐसी विकट राजनैतिक हड़ताल हुई कि नगर में इक्के तांगे तक बंद थे। 13 अप्रैल 1919 को जलियावाला काण्ड ने सम्पूर्ण नगर में प्रतिशोध की ज्वाला सुलगा दी थी। आन्दोलनों के समय कानपुर के दोनों प्रतिद्वंदी दलों में होड़ अच्छी चलती थी।

कानपुर का नवजागरण भाग आठ- प० लक्ष्मीकांत त्रिपाठी

लखनऊ अधिवेशन से लौटते हुए भारतीय क्रान्ति के ज्वालामुखी, महान देशभक्त, उद्भट विद्वान महाराज तिलक का कानपुर में ऐतिहासिक आगमन हुआ। कानपुर के लिए लज्जा और कलंक की बात है कि स्टेशन पर गणेश जी, अरोड़ा जी के अतिरिक्त और कोई उन्हें लेने नहीं गया था।