Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
नीरजा हेमेन्द्र की कहानी 'एक तितली का जीवन'

मैंने और आन्या ने जैसे ही तारा के आँगन में प्रवेश किया, तारा को व्हीलचेयर पर बैठकर कमरे की ओर जाते हुए देखा। आन्या की चीख निकल गयी। आश्चर्यचकित मैं भी थी। मुझे कुछ नहीं सूझ रहा था कि तारा से क्या कहूँ? मुझे और आन्या को देखकर एक अपरिचित-सी मुस्कान लिए तारा अपने कमरे में चली गयी।

शुभदा मिश्र की कहानी 'वह कोहिनूर'

इतना ज़रूर जानती हूँ कि जिनके भीतर यह कोहिनूर दमकता रहता है, वह कुछ न कुछ कर गुज़रते हैं। यह मेरा अनुभूत सत्य है कि जिनके पास बड़ी-बड़ी डिग्रियाँ थीं, उन्हें जब बड़ी ज़िम्मेदारियाँ मिलीं तो संभाल नहीं सके। लड़खड़ा गये। गिर गये। जिनके पास ऐसी भारी डिग्रियाँ नहीं थीं, उन्होंने सुमेरू हथेली में उठा लिया। उनके भीतर उस कोहिनूर का प्रकाश था।

सन्दीप तोमर की कहानी 'माय लाइफ इज़ नो मोर'

"लेकिन क्या? तुम्हारी ख़ामोशी कंचन को खलती रही और तुम… तुम उसके सपनो से अंजान बने रहे या अंजान बनने का स्वांग रचते रहे। कब तक ... आखिर कब तक... कोई तुम्हारी ख़ामोशी को बर्दाश्त करता?"

 

दिवाकर पांडेय 'चित्रगुप्त' की कहानी 'बंदनवार'

तभी, दूर से एक गाड़ी की आवाज ने सारी हलचल को ठहरा दिया। धूल का गुबार उड़ता हुआ दिखा, और एक सेना की गाड़ी जनवासे के पास रुकी। उसमें से कई जवान उतरे, उनके कदमों में अनुशासन और चेहरों पर गंभीरता थी। सबसे आगे सूबेदार साहब थे, जिनके चेहरे पर कर्तव्य की कठोरता स्पष्ट झलक रही थी। मंगल महतो की आँखें अपने बेटे को खोज रही थीं, पर वह कहीं नहीं दिखा। एक अनजानी आशंका उनके दिल को चीरने लगी।