Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
महेश कुमार केशरी की कहानी 'इंतज़ार'

रूना बेकार में ही अपने दिमाग़ को तकलीफ़ दे रही थी। वो भी किसी अनजान व्यक्ति के लिए....।
खैर रूना को आधी रात के बाद सोच-विचार करते-करते नींद भी आ जाती। ये रोज़ का सिलसिला-सा चल पड़ा था। अब रूना को मंजू को रोज़ गेट पर खड़े रहते देखने की आदत पड़ गयी थी।

नीरजा हेमेन्द्र की कहानी 'टूटती, सँवरतीं औरतें'

घर सँवारने- बनाने वाली महिला, अपने लिए कब जी पाती है! ख़ुद को कब सँवार पाती है! नीरजा हेमेन्द्र की यह कहानी इस प्रश्न को समझने की एक जुगत है। लड़की, विवाहिता गृहिणी तथा वृद्धा के सभी पड़ावों पर केवल और केवल घर तथा परिवारजन की ज़रूरतों को अंजाम देते हुए वह अपने आप को किस प्रकार लगभग बिसरा ही देती है, इसका अहसास ख़ुद उसे ही नहीं होता। स्त्री जाति के ऐसे त्याग हम अपने आसपास बराबर देखते हैं, पर ध्यान कहाँ जाता है उन तक! यह कहानी ध्यान ले जाती है उनकी तरफ।

अनिता रश्मि की कहानी 'बंद दरवाज़े के पार'

अनिता रश्मि जी यह कहानी अजनबीयत और अकेलेपन से शुरू होती है, और अपनेपन तथा संवेदनाओं से साथ ख़त्म। कहानी क्या है, हमारे दौर में पनपती एक अजीब-सी संस्कृति का चित्र खींचा है रचनाकार ने और बताने का प्रयास किया है कि इस 'गैप' को कैसे भरा जा सकता है। संवेदनाओं से, अपनत्व से लेकिन बिना जज किये, बिना बात बनाए, केवल मज़बूरी को समझते हुए। दरअसल शहरी कल्चर में सबकी एक कहानी है और वह कहानी शायद लज्जा अथवा उपहास के डर से हमें अलग-थलग किए दे रही है। यह कहानी इसी अलग-थलग पड़ते समाज को जोड़ने की कोशिश में एक 'टूल' थमाती है हमारे हाथों में। संवेदनशीलता का टूल।

सुशांत सुप्रिय की कहानी 'एक उदास सिम्फ़नी'

सुशांत सुप्रिय हिन्दी कथा-कविता में अपनी एक अलग और अलहदा जगह रखते हैं। अलग शैली और अलग तरह की भाषा के ज़रिए वे अपनी रचनाओं में एक ऐसी दुनिया रचते हैं, जहाँ सबकुछ धुँधला-सा लेकिन एकदम स्पष्ट होता है। ये दुनिया अपने समानांतर कहानी की दुनिया से बहुत अलग दिखती है और पाठक को पूरी तरह बाँध के रखती है। इनकी काव्यात्मक भाषा आकर्षित ही नहीं, सम्मोहित भी करती है।

कहानी 'एक उदास सिम्फ़नी' एक बेरोज़गार युवक का प्रेम और कैरियर के बीच का द्वंद्व लिए हुए है, जहाँ प्रेम बाक़ी तमाम मुश्किलों पर भारी पड़ता दिखता है। यहाँ एक-दूसरे में गडमड दो प्रेमी हैं, जो कविता के ज़रिए जुड़े हैं और अपने प्रेम को कविता की ही तरह जीते हैं। कहानी अपने समय और जीवन की जीवंत तस्वीर बुनती है, जिसमें एक देश को खोखला व परेशान करते सभी क़िस्से हैं। इन तमाम क़िस्सों पर, तमाम दुविधाओं पर प्रेम का रंग सुकून की चादर तान देने का प्रयास करता है।

- के० पी० अनमोल