Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
हंसा दीप की कहानी- बैटरी

प्रकृति के इस रूप का सामना करने के लिए इंसान को बहुत तैयारी करनी पड़ती। कभी-कभी जब इंसानी मस्तिष्क से चूक हो जाए तो लोग “आ बर्फ, मुझे जमा कर देख” की तर्ज पर सोफी की तरह जानबूझ कर बर्फीले मौसम को चुनौती देने की गलती कर बैठेते। सोफी का हठ कहें या फिर मजबूरी, वह इस जानलेवा मौसम में हाईवे पर है, गाड़ी में। कल उसे ज्वाइन करना है। जाना जरूरी है। 

शशि श्रीवास्तव की कहानी- घर

काश उसके पैदा होते ही माँ की बीमारी से वह भी संक्रमित हो जाती। दादी उसे बकरी का दूध पिला कर ना पालती, मरने देती। ना वह होती ना उसे घर की तलाश होती। घर जहां जिंदगी साँस लेती है। हँसती है। मुस्कुराती है। ऐसे घर की आरजू सबको होती है। पर मिलता किसी किसी को है।

सूर्यबाला की कहानी- यादों के बंदनवार

व्यक्ति कभी बुरा नहीं होता, स्थितियाँ बनाती हैं उसे बुरा..." लेकिन मई की वह जलती-झुलसती दोपहरी में कभी नहीं भूल सकती, जब विश्वविद्यालय ऑफिस के अपने कक्ष में विभागाध्यक्ष ने दहाड़कर, मुझे मिल चुकी छात्रवृत्ति के अनुमति पत्र पर, सिर्फ इसलिए अपने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था, क्योंकि उनके द्वारा संस्तुति किये गये शोध छात्र की छात्रवृत्ति नहीं स्वीकृत हुई थी।....

सुधा ओम ढींगरा कि कहानी- एग्ज़िट

''क्या बेहूदा बात कर रही हो, तुम भी जानती हो कि मेहता परिवार कितना ओछा है, कृत्रिमता अंग-अंग से छलकती है, बातें कितनी बनावटी करते हैं।''

कार के नैविगेटर की आवाज़ उभरती है ''टेक लेफ्ट ...''
सुधांशु ने स्टीयरिंग व्हील बाईं ओर घुमा दिया----

'' अजय मेहता से नफरत और नापसंद की बात नहीं है संपू , समस्या है उसकी डींगे....पूरी पार्टी में वह हाँकता है और अफसोस कि लोग उसे सुनतें हैं।''