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वसंत जमशेदपुरी वसंत जमशेदपुरी
निवास जमशेदपुर (झारखण्ड)
भाषा mavasant1960@gmail.com

मूल नाम- मामचंद अग्रवाल
जन्मतिथि- 08 दिसंबर, 1957
जन्मस्थान- जमशेदपुर (झारखण्ड)
शिक्षा- आई० कॉम
लेखन विधाएँ- हिंदी, राजस्थानी एवं भोजपुरी में दोहा, मुक्तक, गीत, ग़ज़ल, मुक्त छंद, लघुकथा आदि
प्रकाशन- अँजुरी भर गीत (गीत संकलन), ससुराला (ससुराल पर मुक्तक), महकती हुई रात होगी (हिंदी ग़ज़ल संग्रह), मुट्ठी भर वातास (दोहा सतसई) प्रकाशित।
बाल-बाँसुरी, बिहार के बाल साहित्यकार, इंद्रधनुष, दोहा दर्शन, सुकवि पच्चीसी, त्रिवेणी, सूली ऊपर सेज, साक्षात्कार, आइने के सामने, सत्यम काव्य मेखला, काव्य गुंजना, अभिनव कुंडलिया, 55 हिन्दुस्तानी ग़ज़लें, लघुकथा शतक, करो रक्त का दान, हिंदी ग़ज़ल के साक्षी, कुण्डलिया शतक, आचमन, सँवरता बचपन आदि साझा प्रकाशनों में रचनाएँ प्रकाशित।
इनके अलावा देशभर की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।
संपादन- आह्वान, जय भारती, कुरजाँ, राजस्थान नवयुक संघ- मानगो की रजत जयंती एवं स्वर्ण जयंती स्मारिका
सम्मान- काव्य शास्त्री, कविवर बच्चन पाठक सलिल सम्मान, दोहा रत्न, मुक्तक शिरोमणि, मुक्तक समस्या-पूर्ति सम्मान, काव्य दिग्गज, दोहा सम्राट, रचनाकार सम्मान, गीत श्री, श्री साहित्य गौरव सम्मान, कलम की सुगंध- झारखंड गौरव सम्मान, रंग श्री सम्मान, भाई जी हनुमान प्रसाद पोद्दार सम्मान, सृजन साहित्य सम्मान, उषा देवी मरुधर साहित्य सम्मान, हिंदी साहित्य शिरोमणि आदि सम्मानों से विभूषित।
सहयोग प्रकाशन द्वारा आयोजित 'आओ बचपन सँवारें' बाल कविता लेखन में गीत 'आओ बच्चो भरें सिकोरा' को द्वितीय पुरस्कार।
संपर्क- सीमा वस्त्रालय, राजा मार्केट, डिमना रोड, मानगो बाज़ार, जमशेदपुर- 831012
मोबाइल- 9334805484


गीत (3 रचनाएँ)

वसंत जमशेदपुरी के गीत

हम भूखी परिपाटी हैं तुम काजल, टिकुली, फुलेल हो,हम खेतों की माटी हैं।छप्पनभोग न भाए तुमको,हम भूखी परिपाटी हैं।। तुम क्या जानो भूख-ग़रीबी,क्या जानो तुम लाचारी।चर...

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वसंत जमशेदपुरी के गीत

जब-जब मेघ झरे अंबर से जब-जब मेघ झरे अंबर से,झंझा पंथ बुहारे।तब-तब प्रीत-पखेरू बोले,आजा प्रीतम प्यारे।। ठंडी-ठंडी पुरवाई येतन में अगन लगाए,रिमझिम-रिमझिम मेहा म...

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वसंत जमशेदपुरी के गीत

गीत- एक मन के कोरे कागज़ पर,प्रियवर ने "प्रीत" लिखा।मुझे लगा उसने कोई,जीवन संगीत लिखा।। तन मेरा पतझड़ जैसा था,छुआ किसी ने चहक गया।मुस्काकर देखा उसने तो,जाने...

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इरा वेब पत्रिका में वसंत जमशेदपुरी की रचनाएँ