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वसंत जमशेदपुरी के गीत

वसंत जमशेदपुरी के गीत

बरसाने की राधा हो तुम,
ब्रज का हूँ नटनागर मैं।
वृंदावन की कुंज गली तुम,
मैं यमुना का तीर प्रिये।


जब-जब मेघ झरे अंबर से

जब-जब मेघ झरे अंबर से,
झंझा पंथ बुहारे।
तब-तब प्रीत-पखेरू बोले,
आजा प्रीतम प्यारे।।

ठंडी-ठंडी पुरवाई ये
तन में अगन लगाए,
रिमझिम-रिमझिम मेहा मेरे
मन की प्यास बढ़ाए।
गरज-तरज तन-मन को पीड़ित
करते घन-कजरारे।।
जब-जब मेघ झरे अंबर से,
झंझा पंथ बुहारे।

तपती धरती को अंबर ने
हौले-से दुलराया,
जैसे परदेशी बालम बिन
पाती द्वारे आया।
और चकित चंचला प्रेयसी
अपलक उसे निहारे।।
जब-जब मेघ झरे अंबर से,
झंझा पंथ बुहारे।

सूखी नदिया धन्य हो गयी
अंतर्मन सरसाया,
टूट गये तटबंध नेह के
तन ऐसा हुलसाया।
जाल लिए नदियों के तट पर
आ पहुँचे मछुआरे।।

*****


तुम तपती वसुधा जैसी हो

तुम तपती वसुधा जैसी हो,
मैं पावस का नीर प्रिये।
क्षण भर में हर लेता हूँ मैं,
तन-मन की सब पीर प्रिये।।

तुम फागुन की पिचकारी-सी,
मैं हूँ रंग-अबीर शुभे।
आओ घुलमिल जाएँ जैसे,
घुलता जल में क्षीर शुभे।
हर युग में हमने ही मिलकर,
गीत प्रणय के गाए हैं,
कभी राधिका, कभी उर्वशी,
कभी बनी तुम हीर शुभे।
तुम महलों की राजकुमारी,
मैं अलमस्त फकीर प्रिये।
तुम तपती वसुधा जैसी हो,
मैं पावस का नीर प्रिये।।

तुम हहराती-सी गंगा हो,
बाँह पसारे सागर मैं।
द्वार तुम्हारे लेकर आया,
मन की रीती गागर मैं।
मिलने को आतुर हो तुम भी,
मन मेरा भी है व्याकुल,
बरसाने की राधा हो तुम,
ब्रज का हूँ नटनागर मैं।
वृंदावन की कुंज गली तुम,
मैं यमुना का तीर प्रिये।
तुम तपती वसुधा जैसी हो,
मैं पावस का नीर प्रिये।।

तुम पूनम की धवल चाँदनी,
मैं राकेश निशाकर हूँ।
साँझ ढले सिंदूर लिए मैं,
आया प्रखर दिवाकर हूँ।
रजत-कटोरा लेकर आया,
प्रेमामृत छलकाने को,
तृषित अधर से छू लो इसको,
आया द्वार सुधाकर हूँ।
मधुर-मिलन की इस बेला में,
मन है बहुत अधीर प्रिये।
तुम तपती वसुधा जैसी हो,
मैं पावस का नीर प्रिये।।

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रचनाकार परिचय

वसंत जमशेदपुरी

ईमेल : mavasant1960@gmail.com

निवास : जमशेदपुर (झारखण्ड)

मूल नाम- मामचंद अग्रवाल
जन्मतिथि- 08 दिसंबर, 1957
जन्मस्थान- जमशेदपुर (झारखण्ड)
शिक्षा- आई० कॉम
लेखन विधाएँ- हिंदी, राजस्थानी एवं भोजपुरी में दोहा, मुक्तक, गीत, ग़ज़ल, मुक्त छंद, लघुकथा आदि
प्रकाशन- अँजुरी भर गीत (गीत संकलन), ससुराला (ससुराल पर मुक्तक), महकती हुई रात होगी (हिंदी ग़ज़ल संग्रह), मुट्ठी भर वातास (दोहा सतसई) प्रकाशित।
बाल-बाँसुरी, बिहार के बाल साहित्यकार, इंद्रधनुष, दोहा दर्शन, सुकवि पच्चीसी, त्रिवेणी, सूली ऊपर सेज, साक्षात्कार, आइने के सामने, सत्यम काव्य मेखला, काव्य गुंजना, अभिनव कुंडलिया, 55 हिन्दुस्तानी ग़ज़लें, लघुकथा शतक, करो रक्त का दान, हिंदी ग़ज़ल के साक्षी, कुण्डलिया शतक, आचमन, सँवरता बचपन आदि साझा प्रकाशनों में रचनाएँ प्रकाशित।
इनके अलावा देशभर की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।
संपादन- आह्वान, जय भारती, कुरजाँ, राजस्थान नवयुक संघ- मानगो की रजत जयंती एवं स्वर्ण जयंती स्मारिका
सम्मान- काव्य शास्त्री, कविवर बच्चन पाठक सलिल सम्मान, दोहा रत्न, मुक्तक शिरोमणि, मुक्तक समस्या-पूर्ति सम्मान, काव्य दिग्गज, दोहा सम्राट, रचनाकार सम्मान, गीत श्री, श्री साहित्य गौरव सम्मान, कलम की सुगंध- झारखंड गौरव सम्मान, रंग श्री सम्मान, भाई जी हनुमान प्रसाद पोद्दार सम्मान, सृजन साहित्य सम्मान, उषा देवी मरुधर साहित्य सम्मान, हिंदी साहित्य शिरोमणि आदि सम्मानों से विभूषित।
सहयोग प्रकाशन द्वारा आयोजित 'आओ बचपन सँवारें' बाल कविता लेखन में गीत 'आओ बच्चो भरें सिकोरा' को द्वितीय पुरस्कार।
संपर्क- सीमा वस्त्रालय, राजा मार्केट, डिमना रोड, मानगो बाज़ार, जमशेदपुर- 831012
मोबाइल- 9334805484