Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
श्यामसुंदर निगम की व्यंग्य कविता

ग़रीब को धकियाता ग़रीब
अमीर से ऐंठता अमीर
ग़रीब से बिदकता अमीर
बचाने में लगा हर कोई
अपना-अपना मरा ज़मीर

डॉ० नुसरत मेहदी का व्यंग्य लेख 'फेसबुक प्रबंधन व साहित्य में स्थान'

फेसबुक ने अनेक साहित्यकारों व शायरों को जन्म दिया है। आज से पहले यह कार्य कभी इतना सरल नहीं था। कोई अंतर नहीं पड़ता यदि अधेड़ आयु में भी आपको अपनी साहित्यिक क्षमता का अनायास बोध हो जाये।

दामाद: द मोस्ट ओवररेटेड रिश्ता- प्रीति 'अज्ञात'

होता क्या है कि जैसे बहू गृहप्रवेश के साथ ही पूरा घर सँभालने लगती है, इसके ठीक उलट दामाद जी के चरण पड़ते ही पूरा घर उन्हें सँभालने लगता है। परिजन स्वागतातुर हो उनकी राहों में फूल बिछा दिया करते हैं। प्रबल प्रेम पक्ष तो अपनी जगह है ही लेकिन कहीं एक भय भी रहता है कि दामाद नाराज़ न हो जाए। उसकी नाराज़गी का अप्रत्यक्ष मतलब बेटी को दुःख मान लिया जाता है।