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जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
मनोज शुक्ल 'मनुज' मनोज शुक्ल 'मनुज'
निवास लखनऊ (उत्तरप्रदेश)
भाषा gola_manuj@yahoo.in

जन्मतिथि- 04 अगस्त, 1971
जन्मस्थान- लखीमपुर-खीरी
शिक्षा- एम० कॉम०, बी०एड
सम्प्रति- लोक सेवक
प्रकाशित कृतियाँ- मैंने जीवन पृष्ठ टटोले, मन शिवाला हो गया (गीत संग्रह)
संपादन- सिसृक्षा (ओ०बी०ओ० समूह की वार्षिकी) व शब्द मञ्जरी(काव्य संकलन)
सम्मान- राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान, उत्तर प्रदेश द्वारा गया प्रसाद शुक्ल 'सनेही' पुरस्कार
नगर पालिका परिषद गोला गोकरन नाथ द्वारा सारस्वत सम्मान
भारत-भूषण स्मृति सारस्वत सम्मान
अंतर्ज्योति सेवा संस्थान द्वारा वाणी पुत्र सम्मान
राष्ट्रकवि वंशीधर शुक्ल स्मारक एवं साहित्यिक प्रकाशन समिति, मन्योरा-खीरी द्वारा राजकवि रामभरोसे लाल पंकज सम्मान
संस्कार भारती गोला गोकरन नाथ द्वारा साहित्य सम्मान
श्री राघव परिवार गोला गोकरन नाथ द्वारा सारस्वत साधना के लिए सम्मान
आगमन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समूह द्वारा सम्मान
काव्या समूह द्वारा शारदेय रत्न सम्मान
उजास, कानपुर द्वारा सम्मान
यू०पी०एग्री०डिपा०मिनि० एसोसिएशन द्वारा साहित्य सेवा सम्मान व अन्य सम्मान
उड़ान साहित्यिक समूह द्वारा साहित्य रत्न सम्मान
प्रसारण- आकाशवाणी व दूरदर्शन से काव्य पाठ, कवि सम्मेलनों व अन्य साहित्यिक कार्यक्रमों में सहभागिता
निवास- जानकीपुरम विस्तार, लखनऊ (उ०प्र०)
मोबाइल- 6387863251


छन्द की पाठशाला (16 रचनाएँ)

छन्द के प्रकार- मनोज शुक्ल 'मनुज'

इससे पूर्व अंक में आप घनाक्षरी के चार भेदों (मनहरण घनाक्षरी,रूप घनाक्षरी, जनहरण घनाक्षरी व डमरू घनाक्षरी)के बारे में पढ़ चुके हैं। अगले चार भेद निम्नवत् हैं-&nb...

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घनाक्षरी छन्द एवं उसके प्रकार

घनाक्षरी  यह एक वार्णिक छंद है, इसमें मात्राओं की नहीं बल्कि वर्णों की गणना होती होती है।उदाहरण:- जीवन- 3 वर्ण, अम्ब- 2 वर्ण, गूँजता- 3 वर्ण ,राम- 2 वर्ण...

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छन्द में गण- मनोज शुक्ल 'मनुज'

गण वार्णिक छन्दों को लिखने के लिए गण ज्ञान आवश्यक है। पिंगल शास्त्र के अनुसार निम्नलिखित आठ गण होते हैं। 1.यगण 2.मगण 3.तगण 4.रगण5.जगण। 6.भगण। 7.नगण। 8.सगण उप...

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छन्द में काव्य दोष- मनोज शुक्ल 'मनुज'

काव्य दोष कविता में होने वाले निम्न दोषों का परिहार करके आप अपनी रचनाओं को अधिक प्रभावशाली बना सकते हैं।आचार्य मम्मट के अनुसार - मुख्यार्थ का अपकर्ष करने वाले...

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छन्द के गुण- मनोज शुक्ल 'मनुज'

काव्य गुणकाव्य में आंतरिक सौन्दर्य तथा रस के प्रभाव से स्थायी रूप से विद्यमान तत्व को काव्य गुण कहते हैं। ये कविता में उसी प्रकार विद्यमान रहता है जैसे व्यक्ति...

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छन्द और छन्दों के प्रकार-मनोज शुक्ल 'मनुज'

छन्द वेद के छः अंगों- शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द तथा ज्योतिष में छन्द भी है तथा वेद की ऋचाएं छन्द बद्ध हैं ,जिससे यह स्पष्ट है कि छन्द ईश्वर प्रद...

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इरा वेब पत्रिका में मनोज शुक्ल 'मनुज' की रचनाएँ