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शुभारंभ, शब्द और समय- अलका मिश्रा

शुभारंभ, शब्द और समय- अलका मिश्रा

तकनीक ने हमारी दुनिया को छोटा कर दिया है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने लेखन और सृजन की परिभाषाओं पर भी नए प्रश्न खड़े कर दिए हैं। लेकिन तकनीक शब्द दे सकती है, भाषा को नया रूप दे सकती है। संवेदना, अनुभव और मनुष्य होने की गहराई अब भी मनुष्य के भीतर से ही आती है।

सितंबर का महीना अपने साथ कई अर्थ लेकर आता है। गणपति-पूजा की मंगलमय आस्था, हिंदी दिवस का आत्मगौरव और बदलते समय की तेज़ रफ़्तार, इन तीनों के बीच कहीं न कहीं मनुष्य, उसकी संवेदना और उसकी सृजनशीलता का प्रश्न छिपा है।

गणपति केवल विघ्नहर्ता नहीं, बुद्धि, विवेक और शुभारंभ के प्रतीक भी हैं। किसी भी नए कार्य की शुरुआत उनके स्मरण से करना हमारी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा रहा है। लेकिन आज जब हम गणपति की पूजा करते हैं, तो शायद हमें अपने भीतर के उन विघ्नों को भी पहचानना चाहिए, जो हमें बेहतर मनुष्य बनने से रोकते हैं- अहंकार, असहिष्णुता, जल्दबाज़ी और संवेदनहीनता।

और फिर आती है हिंदी, हमारी भाषा, हमारी अभिव्यक्ति और हमारी स्मृतियों की भाषा।

14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाते हुए हम हिंदी के गौरव की बात करते हैं, लेकिन हिंदी का वास्तविक सम्मान केवल समारोहों, भाषणों और नारों से नहीं होगा। भाषा तब जीवित रहती है, जब उसमें समय की धड़कन सुनाई दे, जब वह नई पीढ़ी के प्रश्नों को स्वीकार करे और जब उसमें साहित्यकार अपने समय की सच्चाइयों को ईमानदारी से लिखें।

आज हिंदी के सामने चुनौती केवल दूसरी भाषाओं की नहीं है। चुनौती यह भी है कि क्या हम पढ़ने का धैर्य बचा पा रहे हैं? क्या सोशल मीडिया की कुछ पंक्तियों, छोटे वीडियो और त्वरित प्रतिक्रियाओं के बीच हम किसी कविता को ठहरकर पढ़ते हैं? क्या किसी कहानी के पात्र के दुःख को अपना दुःख समझ पाते हैं?

आजकल सब कुछ बहुत तेज़ी से बदल रहा है। तकनीक ने हमारी दुनिया को छोटा कर दिया है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने लेखन और सृजन की परिभाषाओं पर भी नए प्रश्न खड़े कर दिए हैं। लेकिन तकनीक शब्द दे सकती है, भाषा को नया रूप दे सकती है। संवेदना, अनुभव और मनुष्य होने की गहराई अब भी मनुष्य के भीतर से ही आती है।

शायद इसी कारण साहित्य आज पहले से अधिक आवश्यक है।

साहित्य हमें केवल सुंदर शब्द नहीं देता, वह हमें दूसरे की आँखों से दुनिया देखने की क्षमता देता है। वह प्रश्न पूछता है, असहमति के लिए जगह बनाता है और हमें अपने समय का आईना दिखाता है।

इरा की यात्रा भी इसी विश्वास से जुड़ी है कि साहित्य केवल पुस्तक के पन्नों पर नहीं, बल्कि मनुष्य के जीवन में साँस लेता है। नए लेखकों को मंच देना, विविध विधाओं की रचनाओं को पाठकों तक पहुँचाना और साहित्य के माध्यम से संवाद की संस्कृति को आगे बढ़ाना हमारे लिए केवल एक प्रयास नहीं, एक ज़िम्मेदारी है।

इस गणपति पूजा पर हम अपने भीतर के विघ्नों को दूर करने का संकल्प लें।
इस हिंदी दिवस पर हिंदी को केवल मनाने के बजाय उसे जीने और समृद्ध करने का संकल्प लें।
और इस बदलते समय में साहित्य से अपना रिश्ता और गहरा करें।

क्योंकि समय बदलता रहेगा, तकनीक बदलती रहेगी, माध्यम बदलते रहेंगे—
लेकिन मनुष्य की संवेदना और शब्दों की शक्ति कभी अप्रासंगिक नहीं होगी।

इसी विश्वास के साथ,
आप सभी को गणपति पूजा एवं हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

शुभपठन। शुभसृजन।

— संपादक

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रचनाकार परिचय

अलका मिश्रा

ईमेल : alkaarjit27@gmail.com

निवास : कानपुर (उत्तर प्रदेश)

जन्मतिथि-27 जुलाई 1970 
जन्मस्थान-कानपुर (उ० प्र०)
शिक्षा- एम० ए०, एम० फिल० (मनोविज्ञान) तथा विशेष शिक्षा में डिप्लोमा।
सम्प्रति- प्रकाशक ( इरा पब्लिशर्स), काउंसलर एवं कंसलटेंट (संकल्प स्पेशल स्कूल), स्वतंत्र लेखन तथा समाज सेवा
विशेष- सचिव, ख़्वाहिश फ़ाउण्डेशन 
लेखन विधा- ग़ज़ल, नज़्म, गीत, दोहा, क्षणिका, आलेख 
प्रकाशन- बला है इश्क़ (ग़ज़ल संग्रह) प्रकाशित
101 महिला ग़ज़लकार, हाइकू व्योम (समवेत संकलन), 'बिन्दु में सिन्धु' (समवेत क्षणिका संकलन), आधुनिक दोहे, कानपुर के कवि (समवेत संकलन) के अलावा देश भर की विभिन्न साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं यथा- अभिनव प्रयास, अनन्तिम, गीत गुंजन, अर्बाबे कलाम, इमकान आदि में रचनाएँ प्रकाशित।
रेख़्ता, कविता कोष के अलावा अन्य कई प्रतिष्ठित वेब पत्रिकाओं हस्ताक्षर, पुरवाई, अनुभूति आदि में रचनाएँ प्रकाशित।
सम्पादन- हिज्र-ओ-विसाल (साझा शेरी मजमुआ), इरा मासिक वेब पत्रिका 
प्रसारण/काव्य-पाठ- डी डी उत्तर प्रदेश, के टी वी, न्यूज 18 आदि टी वी चैनलों पर काव्य-पाठ। रेखता सहित देश के प्रतिष्ठित काव्य मंचों पर काव्य-पाठ। 
सम्मान-
साहित्य संगम (साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक) संस्था तिरोड़ी, बालाघाट मध्य प्रदेश द्वारा साहित्य शशि सम्मान, 2014 
विकासिका (साहित्यिक सामजिक एवं सांस्कृतिक) संस्था कानपुर द्वारा ग़ज़ल को सम्मान, 2014
संत रविदास सेवा समिति, अर्मापुर एस्टेट द्वारा संत रवि दास रत्न, 2015
अजय कपूर फैंस एसोसिएशन द्वारा कविवर सुमन दुबे 2015
काव्यायन साहित्यिक संस्था द्वारा सम्मानित, 2015
तेजस्विनी सम्मान, आगमन साहित्य संस्था, दिल्ली, 2015
अदब की महफ़िल द्वारा महिला दिवस पर सम्मानित, इंदौर, 2018, 2019 एवं 2020
उड़ान साहित्यिक संस्था द्वारा 2018, 2019, 2021 एवं 2023 में सम्मानित
संपर्क- एच-2/39, कृष्णापुरम
कानपुर-208007 (उत्तर प्रदेश) 
 
मोबाइल- 8574722458