Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

नेहा राजपुरोहित की कविताएँ

नेहा राजपुरोहित की कविताएँ

नेहा की प्रस्तुत कविताएँ आज की शिक्षित, सजग एवं आत्मविश्वास से भरी हुई महिला की अभिव्यक्ति हैं। एक तरफ ये कविताएँ आधी आबादी की शेष दुनिया से टूटी हुई उम्मीदों के बाद की स्थिति का बयान हैं, वहीं दूसरी तरफ यह आत्मबोध का आख्यान कि उसे अपने लिए आप खड़े होना होगा। इन कविताओं में जहाँ अपने संसार, परिवेश से अवगत होना है, वहीं अपनी सामर्थ्य, अपने बल की पहचान भी।

मैंने निश्चय कर लिया

मैंने निश्चय कर लिया
अब न रुकना है
अब न बिखरना है
यह लक्ष्य है शाश्वत- अनंत
मुझे इसी और चलते रहना है

मैंने निश्चय कर लिया
भावों में न अटकना है
संतुष्टि पर न झपटना है
आत्मविकास का अनवरत प्रवाह है
मुझे इसी ओर चलते रहना है

मैंने निश्चय कर लिया
खोखले आधारों पर विश्राम न करना है
भरोसा व्यवहारिकता पर ही परखना है
यह पुल है
अडिगता एवं निडरता की परीक्षा का
मुझे इसी ओर चलते रहना है

मैंने निश्चय कर लिया
साम्य में ही सहजता है
सहजता से ही सजगता में रहना हैं
यह प्रभावी स्वाभाविकता का नियम है
मुझे इसी ओर चलते रहना है

मैंने निश्चय कर लिया
जीवन-मूल्य पर जनहित को ही रखना है
स्वयं का सदैव कठोर मूल्यांकन ही मापना है
यह राह हैं विचलनों के भरपाई की
मुझे इसी ओर चलते रहना है

*******


इंतज़ार को छोड़ देना चाहिए

आख़िर वक़्त कब आएगा तेरे इंतजार का
अब तुझे ही अपने सपनों के लिए
इंतज़ार को छोड़ देना चाहिए

तू जानती है राह कठिन और कंटीली होगी
फ़िक्र न कर
तेरे विश्वास में ही सकारात्मकता सुरीली होगी
कहाँ से, कैसे?
प्रश्नों के उत्तर पूछना
दूसरों की छाँव से छोड़ दे
यहाँ से वहाँ तक
लक्ष्य के सारे उत्तर पूछना
तू स्वयं से अब ढूँढ ले

आख़िर वक़्त कब आएगा तेरे इंतज़ार का!
अब तुझे ही अपने सपनों के लिए
इंतज़ार को छोड़ देना चाहिए

दूसरों से, दूसरों के लिए, ख़ुद को तोड़ना बंद कर
स्वयं से ही, स्वयं को जोड़ना शुरु कर
मूल, ब्याज और प्रत्याय सब तेरी ही शक्ति है
फिर क्यों हाथ फैलाकर कुछ माँगने को तू तत्पर बने
न बन! न बन!

*******


भरोसा है मुझे ख़ुद पर

भरोसा है मुझे ख़ुद पर
लक्ष्य बेहतरीन चुनूँगी
हर एक क़दम पर सभलूँगी
पीछे मुड़कर कभी न फिसलूँगी
प्रत्येक क्षण ख़ुद को प्रेरित मैं करूँगी
भरोसा है मुझे ख़ुद पर
आत्मविकास की ओर सदैव बढ़ती रहूँगी

हर रिश्ते में सहृदय प्रयास से ढलूँगी
माँ-बाप की प्रत्येक हँसी को साध्य समझकर चलूँगी
मान-मर्यादा व संस्कारों के तपन से निखरूँगी
न्याय एवं नारीत्व की ख़ातिर प्रखर ढाल बनकर पडूँगी
भरोसा है मुझे ख़ुद पर
आत्मविकास की ओर सदैव बढ़ती रहूँगी

अनुभवों रूपी मोतियों को
सक्षमता की माला में पिरोऊँगी
विश्वास की लौ से ही
नकारात्मक अँधेरे को दूर झटकाऊँगी
भरोसा है मुझे ख़ुद पर
आत्मविकास की ओर सदैव बढ़ती रहूँगी

*******


मैं मुस्कुराती रहती हूँ

प्रयासों की सौगंध में
सजगता के फैलाव में
सीखने की चाह में
मैं मुस्कुराती रहती हूँ

मंज़िल की राह में
रुकावट के बहाव में
निरंतरता की चाह में
मैं मुस्कुराती रहती हूँ

प्रत्येक ख़ुशी की महक में
नई उम्मीदों के ठहराव में
जीवन के प्रत्येक पड़ाव में
मैं मुस्कुराती रहती हूँ

0 Total Review

Leave Your Review Here

रचनाकार परिचय

नेहा राजपुरोहित

ईमेल : neharajpurohit2024@gmail.com

निवास : केकिंद्र, ज़िला- पाली (राज.)

पत्नी- श्री जितेन्द्र सिंह राजपुरोहित
पिता- श्री पूनम राजपुरोहित मानवताधर्मी
माता- श्रीमती विनिया संतोष
जन्मस्थान- जोरावरपुरा (चुरू)
जन्मतिथि- 20 जुलाई, 1997
शिक्षा- एम. काॅम, बी. एड
सम्प्रति- अध्यापन
प्रकाशन- 'सृजना नवांकुर' काव्य संग्रह में रचनाएँ प्रकाशित। कामधेनु गौ अधिकार पत्रिका में रचनाएँ प्रकाशित।
पता- 97, राजपुरोहितों का बास, केकिंद्र, ज़िला- पाली (राज.)- 306301