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मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

डॉ० राम वल्लभ आचार्य के गीत

डॉ० राम वल्लभ आचार्य के गीत

शीतल पड़ी फुहार
धरा से गंध उठी सौंधी।

धरती का रस चूस चूस कर,
मेघ हुए भारी;
आखिर कितना ढोते,
झरने की थी लाचारी;
जल से भरी गगरिया अपनी,
रख दी फिर औंधी।

छा गये बादल

हवाओं ने शंख फूँके,
दिशाओं में बजे मादल,
उमड़ करके घुमड़ करके,
गगन में छा गये बादल।

सागरों से नीर लेकर,
धरित्री की पीर लेकर,
उड़ चले बनकर पखेरू,
धूम्रवर्णी चीर लेकर,
आँज कर अँधियार काजल,
गगन में छा गये बादल।

शिखर का अभिषेक करते,
सरित-सर को एक करते,
सृष्टि का संताप हरने का,
जतन प्रत्येक करते?
हुए पुलकित खेत जंगल,
गगन में छा गये बादल।

झमझमाझम मेह बरसे,
निर्झरों के प्राण हरसे
नींद से जागी लतायें,
विटप क्षुप तृण पात सरसे,
नाचते हो मोर पागल,
गगन में छा गये बादल

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डण्डे हम

डण्डे जिनके हाथ,
उन्हीं के झण्डे हम।

जब जी चाहे,
हमें हवा में लहराते,
नाम हमारा लेकर,
बढ़ते ही जाते,
उनके लम्बे हाथों के,
हथकण्डे हम।

हमें उठाकर,
राजनीति वे करते हैं,
मार हमारा हक,
अपना घर भरते हैं,
उनका जलसा,
और झेलते डण्डे हम।

लगा रखा है,
गले हमें ताबीज बना,
झूठ और मक्कारी की,
दहलीज बना,
पहुंचे हुए पीर वे,
उनके गण्डे हम।

उनके हाथों में,
वादों की फुलझड़ियां,
हाथ हमारे,
मजबूरी की हथकड़ियां,
मुर्गी उनकी पर,
सोने के अण्डे हम।

बार बार जयकार,
हमारी होती है,
किन्तु कामना सदा,
हमारी रोती है,
वे कंचन के कलश,
काँच के हण्डे हम।

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बदल रहे हैं गाँव

बदल रहे हैं गाँव हमारे!

सूखे कुएँ, बने कचराघर,
ट्यूब वेल लग गये घरों में;
दूध भात को बच्चे तरसें,
दूध बिके जाकर शहरों में;
भूल गये रस्ता मन्दिर का,
‘बार’ जा रहे पाँव हमारे।

कक्का काकी नजर न आते,
अब तो हैं बस अंकल-आंटी;
राम-श्याम का पता नहीं है,
दिखते हैं बस टिंकू-बंटी;
मौन हुई हिन्दी की कोयल
अंग्रेजी में काँव हमारे।

चौपालों की बात न पूछो,
भवन बन गया पंचायत का;
पंचों में नित तू-तू मैं-मैं,
सिक्का चलता बहुतायत का;
अपनी-अपनी साख जमाने,
उल्टे सीधे दाँव हमारे।

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गंध उठी सौंधी

शीतल पड़ी फुहार
धरा से गंध उठी सौंधी।

धरती का रस चूस चूस कर,
मेघ हुए भारी;
आखिर कितना ढोते,
झरने की थी लाचारी;
जल से भरी गगरिया अपनी,
रख दी फिर औंधी।

जितनी भी ऊँचाई पाई,
उतने बौराये,
घोर गर्जनायें करके,
आपस में टकराये।
भाँज रहे तलवारें,
देखो बिजली सी कौंधी।

लड़ते-लड़ते हार गये तो,
फौरन हवा हुए।
जाते-जाते, धरती के
छालों की दवा हुए।
मौका ताक रही किरणों ने,
रची चकाचौंधी।

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सरासर बेईमानी

हम प्यासे हैं;
और तुम्हारे घट में पानी है।
बन्धु ! तुम्हारी,
यही सरासर बेईमानी है।

हमने खोदा कुआँ
और जल तुमने खींचा है;
तुमने बोये बीज
पसीना हमने सींचा है;
तुमने काटी फसल
हमें बस आनाकानी है।

हमने फोड़े पत्थर
राजपथों पर तुम चलते;
महलों में रहते, पर
तुमको दड़बे भी खलते;
हमें उजाड़ तुम्हें गढ़ना ,
सुन्दर राजधानी है।

भरते तुम गोदाम
हमारा चुरा चुरा हिस्सा;
भाग्य नहीं यह तो,
पीढ़ी दर पीढ़ी का किस्सा;
हमें आपदा और तुम्हें,
अवसर वरदानी है।

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वसंत जमशेदपुरी

23 July 2025

अप्रतिम गीत

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रचनाकार परिचय

राम वल्लभ आचार्य

ईमेल :

निवास : भोपाल (मध्य प्रदेश)

डॉ० राम वल्लभ आचार्य
जन्मतिथि- 4 मार्च, 1953, भोपाल (म. प्र.)
शिक्षा- B.Sc, B.A.M.S.,
संप्रति- चिकित्सा
प्रकाशित कृतियाँ-
राष्ट्र आराधन, गीत शृंगार, सुमिरन, गाते गुनगुनाते, अक्खड़ बकबक बचे बोल, पंचजन्य का नाद चाहिए, मैं तुम्हारी बाँसुरी हूँ, जय जिनेन्द्र, पशुप्रेम भजनांजलि, गीतों के गाँव में, हन्तेवोलों हुई रजनी (सभी गीत संकलन)
सम्मिलित संकलनों में सहभागिता-
शब्दायन, गीत अष्टक–2, समकालीन गीत कोश, नयी सदी के स्वर
अन्य उल्लेखनीय तथ्य-
धर्मयुग, साप्ताहिक हिंदुस्तान, मुक्तांगन, चम्पक, बालभारती सहित विभिन्न राष्ट्रीय, प्रादेशिक एवं स्थानीय पत्र–पत्रिकाओं में लेखों का प्रकाशन।
प्रसारण- आकाशवाणी द्वारा AIR-65 के अंतर्गत अनुबंधित गीतकार।
आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के क्षेत्रीय, प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय नेटवर्क पर काव्यपाठ, वार्ता, कहानी, नाटक, टेली फिल्म, संगीतबद्ध गीतों तथा संगीत रूपकों का प्रसारण।
विषय-
महाकौशल, जागरण, राष्ट्र का आह्वान, गोराबाल एवं पशुप्रेम के संपादकीय विभागों का कार्यानुभव।
प्रमुख सम्मान-
   •   अभिनव शब्द शिल्पी सम्मान
   •   तुलसी साहित्य सम्मान
   •   पद्यश्री पुरस्कार (गीत संग्रह–गीत श्रृंगार के लिये)
   •   साहित्य श्री सम्मान
   •   राष्ट्रीय नटवर गीत सम्मान
   •   राजेन्द्र अनुग्रह बाल साहित्य सम्मान
   •   साहित्य परिषद (म. प्र. शासन) का जब्बार बख्शा बाल साहित्य सम्मान
   •   श्रेष्ठ बाल साहित्य सम्मान
   •   चंद्र प्रकाश जायसवाल बाल साहित्य सम्मान
   •   भारत भाषा भूषण सम्मान
   •   संस्कृत भूषण (कालिदास)
   •   नगर निगम भोपाल का दुर्गंध सम्मान
   •   साहित्य अकादमी म. प्र. का डॉ. भ.भ. भवानी प्रसाद मिश्र पुरस्कार सहित अनेकों सम्मान
पूर्व संपादन, प्रकाशन-
‘आरोग्य सुधा’ (मासिक पारिवारिक स्वास्थ्य पत्रिका)
सदस्य एवं पूर्व प्रदेशाध्यक्ष:
मध्य प्रदेश लेखक संघ
संपर्क-
101, रोहित नगर फेस–1, बावड़िया कला, भोपाल म. प्र. 462.039 (निवास)
मोबाइल- 98268 24874