Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

डॉ. कल्पना दुबे के हाइकु

डॉ. कल्पना दुबे के हाइकु

मरघट-सी
पसर जाती शान्ति
औरत बिना।

 

घर बाहर
अच्छे से सम्हालती
सुघड़ है स्त्री।

 

पूछती आज
उत्तर नहीं कोई
क्लिष्ट प्रश्न।

 

मरघट-सी
पसर जाती शान्ति
औरत बिना।

 

प्रेम-विश्वास
मज़बूती बेजोड़
दृढ़ आधार।

 

बदली रीति
बेटी के जन्म पे भी
मंगल गीत।

 

सरगम-सा
गूँजे घर-आँगन
हंसती बेटी।

 

मिला जो पंख
अन्तरिक्ष तक में
रखा कदम।

 

बेटी के हाथ
राफेल की कमान
किससे कम।


कहलाती हैं
बेटियाँ परदेसी
पराया धन।

 

छोड़ जाते हैं
माँ-बाप ओल्डहोम
लाड़ले पुत्र।

 

अक्षर तीन
बड़ी ताक़तवर
औरत आज।


******************

0 Total Review

Leave Your Review Here

रचनाकार परिचय

कल्पना दुबे

ईमेल : kalpnadubey574@gmail.com

निवास : गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)

नाम- डॉ. कल्पना दुबे
जन्मतिथि- 15 जुलाई, 1965
जन्मस्थान- वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
लेखन विधा- कविता, कहानी, उपन्यास, हाइकु, हाइगा, हाइबुन।
शिक्षा- एम. ए., पीएच. डी.
सम्प्रति- प्रोफेसर, हिन्दी विभाग एम. एम. एच. का. गाजियाबाद।
प्रकाशन- कविता पर पुस्तक प्रकाशित, 'जीवन राग' शीर्षक से हाइकु संग्रह शीघ्र प्रकाशित।
सम्मान/पुरस्कार- साहित्य रत्न और सरस्वती सम्मान से सम्मानित।
सम्पर्क- 402, नीलकंठ रेजीडेंसी, वेस्ट माडल टाउन, निकट सम्राट होटल, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल- 9899265309