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मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

छंद की पाठशाला- मनोज शुक्ल 'मनुज'

छंद की पाठशाला- मनोज शुक्ल 'मनुज'

मनोज शुक्ल 'मनुज' पुरस्कृत गीतकार हैं। गीतों एवं छंदों पर आपकी पकड़ अत्यंत गहरी है। आप उड़ान नामक संस्था से जुड़कर गुरुकुल चलाते हैं जिसमें छन्द विधा सिखाई जाती है। गुरुकुल द्वारा आप एक मृतप्राय होती विधा को पुनर्जीवित करने का महान कार्य कर रहे हैं। 

इस अंक में आप कुछ नए छ्न्द जैसे वीर (आल्हा) , सरसी,चौपाई व सखी या आँसू  छन्द आदि पढ़ेंगे। 
 
वीर (आल्हा) छंद 
विधान- 
 
1.यह एक मात्रिक छंद है। 
2.इसमें चार चरण या दो पद होते हैं।
3.पहले और तीसरे चरण में 16-16 तथा दूसरे व चौथे चरण में 15-15 मात्राएँ होती हैं।
4.प्रत्येक पद में 31 मात्रा होती हैं।
5. 16  व 15 मात्रा पर यति होती है।
6.विषम चरण का समापन गुरु (2) या लघु लघु(11)या लघु लघु गुरु (112)या गुरु लघु लघु(211) से व सम चरण  का समापन गुरु लघु (21) से होता है । 
7. दोनों पद के अंत में तुकांत आवश्यक है ।
  
 यह छंद अधिकतर वीर रस में लिखा जाता है, इसलिए इसमें वीर रस की प्रधानता रहती है तथा इसमें अतिशयोक्ति अलंकार की भी प्रचुरता होती है।
 
यह छंद वीर रस प्रधान है, इसी कारण इसका नाम वीर (आल्हा)द पड़ा । छंद को जब गाया जाता है तो धीरे-धीरे इसकी लय तेज़ होती जाती है । इसके गाने वालों को "अल्हैत" कहा जाता था जो कि आज लगभग लुप्त हैं । वे इस तरह से वीर रस में गाते हैं कि सुनने वाले के रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
 
उदाहरण-
 
अपने ही जीवन विष देते।अपने ही मधु देते  दान।।
अपनों से सम्मान मिला है।अपने ही करते अपमान।
                                         मनोज शुक्ल "मनुज"
 
वीर चंद्रशेखर की गोली।हुई कनपटी के उस पार।।
सदा रहे आज़ाद रहेंगे।आज़ादी सबका अधिकार।।
 
2.सरसी छन्द 
 
विधान
 
1-चार पद।
2-आठ चरण।
3-दो- दो पदों में तुकांतता।
4-16,11 पर यति।
5-विषम चरणान्त में लघु गुरु की कोई अनिवार्यता नहीं है।
6-सम चरणों का अंत 21 से अनिवार्यतः होता है।
 
नोट- होली और कबीरा लोकगीत इसी छन्द पर आधारित होते हैं।
 
उदाहरण-
 
पानी  ही   देखा   तो  बेटा, खूब  रहे  हो  काँप,
सोचो क्या होता गर मिलता,नदी किनारे साँप।
पेड़ पड़ोसी का है तो फिर,खाना है फल  तोड़,
अपना  है  तो  जो  तोड़ेगा, तोड़ो  उसके गोड़।
 
                              मनोज शुक्ल"मनुज"

3- चौपाई छन्द 
 
गोस्वामी तुलसी दास ने चौपाई छन्द का अत्यधिक प्रयोग किया है।रामचरितमानस में सबसे अधिक चौपाइयाँ ही हैं।
विधान-
 
1.चार चरण
2.प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ
3.दो चरणों का एक पद होता है।चौपाई में दो पद होते हैं।
4.इस छन्द के चरण के अंत में गुरु लघु(21)नहीं होना चाहिए।
5.चौपाई छन्द के चरणों के अंत में सदैव 22 ,112,211 या 1111 होना चाहिए।
 
उदाहरण-
 
माँगी  नाव  न   केवट आना ।कहइ तुम्हार मरम मैं जाना।।
छुअति सिला भइ नारि सुहाई। पाहन ते न काठ कठिनाई।।
       
                                                     तुलसीदास
 
अम्ब छमबि बड़ि चूक हमारी । लखइ न सुत अवगुन महतारी।।
बुद्धि, विवेक, ज्ञान  नहिं  मोरे । उमगत चलउँ निरखि पद तोरे।।
 
                                                 मनोज शुक्ल"मनुज"
 
4- सखी या आँसू छन्द 
 
विधान-
1.इसके प्रत्येक चरण में १४ मात्राएँ होती हैं।
2.इसमें चार चरण होते हैं।
3.चरणान्त में गुरु होता है।
4. दूसरे और चौथे पद में समतुकांतता होती है।
 
उदाहरण-
 
प्रेम   हमेशा  सात्विक  है,
यह सुख कारक ही होता।
सभी  सुखों से  है उत्तम,
सभी  कलुष ये है धोता।
 
     मनोज शुक्ल"मनुज"

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रचनाकार परिचय

मनोज शुक्ल 'मनुज'

ईमेल : gola_manuj@yahoo.in

निवास : लखनऊ (उत्तरप्रदेश)

जन्मतिथि- 04 अगस्त, 1971
जन्मस्थान- लखीमपुर-खीरी
शिक्षा- एम० कॉम०, बी०एड
सम्प्रति- लोक सेवक
प्रकाशित कृतियाँ- मैंने जीवन पृष्ठ टटोले, मन शिवाला हो गया (गीत संग्रह)
संपादन- सिसृक्षा (ओ०बी०ओ० समूह की वार्षिकी) व शब्द मञ्जरी(काव्य संकलन)
सम्मान- राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान, उत्तर प्रदेश द्वारा गया प्रसाद शुक्ल 'सनेही' पुरस्कार
नगर पालिका परिषद गोला गोकरन नाथ द्वारा सारस्वत सम्मान
भारत-भूषण स्मृति सारस्वत सम्मान
अंतर्ज्योति सेवा संस्थान द्वारा वाणी पुत्र सम्मान
राष्ट्रकवि वंशीधर शुक्ल स्मारक एवं साहित्यिक प्रकाशन समिति, मन्योरा-खीरी द्वारा राजकवि रामभरोसे लाल पंकज सम्मान
संस्कार भारती गोला गोकरन नाथ द्वारा साहित्य सम्मान
श्री राघव परिवार गोला गोकरन नाथ द्वारा सारस्वत साधना के लिए सम्मान
आगमन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समूह द्वारा सम्मान
काव्या समूह द्वारा शारदेय रत्न सम्मान
उजास, कानपुर द्वारा सम्मान
यू०पी०एग्री०डिपा०मिनि० एसोसिएशन द्वारा साहित्य सेवा सम्मान व अन्य सम्मान
उड़ान साहित्यिक समूह द्वारा साहित्य रत्न सम्मान
प्रसारण- आकाशवाणी व दूरदर्शन से काव्य पाठ, कवि सम्मेलनों व अन्य साहित्यिक कार्यक्रमों में सहभागिता
निवास- जानकीपुरम विस्तार, लखनऊ (उ०प्र०)
मोबाइल- 6387863251