Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
छन्द कि पाठशाला- मनोज कुमार शुक्ल 'मनुज'

इससे पूर्व के अंकों में आपने सवैया के मत्त गयंद, मोद, अरसात, किरीट,चकोर, मदिरा, सुमुखि, मुक्ताहरा, मंजरी, लवंगलता, सनेही व दुर्मिल आदि भेदों के विधान के बारे में पढ़ा। इस अंक में मनुज सवैया, सुंदरी सवैया, सुखी सवैया, अरविन्द सवैया, हरीश सवैया व गंगोदक सवैया का विधान उदाहरण सहित दिया जा रहा है।

सवैया छन्द के भेद- मनोज शुक्ल 'मनुज'

इससे पूर्व के अंक में आपने सवैया के मत्त गयंद, मोद, अरसात,किरीट,चकोर व मदिरा सवैया के विधान के बारे में पढ़ा। इस अंक में सुमुखि, मुक्ताहरा, मंजरी, लवंगलता, सनेही व दुर्मिल सवैया का विधान दिया जा रहा है।

सवैया छन्द एवं उनके भेद- मनोज शुक्ल "मनुज"

यह एक वर्णिक छंद है। सवैया गणों पर आधारित होता है। इसमें चार चरण होते हैं। इसमें वर्णिक वृत्तों में 22 से 26 अक्षर के चरण होते हैं। सवैया छंद में चारों चरणों में सम तुकांतता होती है।

घनाक्षरी के भेद-मनोज शुक्ल 'मनुज'

इससे पूर्व अंकों में आप घनाक्षरी के आठ भेदों (मनहरण घनाक्षरी,रूप घनाक्षरी, जनहरण घनाक्षरी, डमरू घनाक्षरी, जलहरण घनाक्षरी, विजया घनाक्षरी,कृपाण घनाक्षरी व हरिहरण घनाक्षरी)के बारे में पढ़ चुके हैं। इस अंक में पढिए शेष चार भेद।