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'यादों का सिलसिला' कथा संग्रह का लोकार्पण

'प्रतिशब्द' संस्था के तत्वावधान में डॉ० उषा मिश्रा के कथा संग्रह 'यादों का सिलसिला' का लोकार्पण यूनाइटेड पब्लिक स्कूल, सिविल लाइन्स के सभागार में आयोजित किया गया।

डॉ० भावना की संपादित पुस्तक 'हमन है इश्क मस्ताना' का लोकार्पण

पुस्तक की संपादक डॉ० भावना ने कहा कि हमन है इश्क मस्ताना में 109 ग़ज़लकारों को शामिल किया गया है। अमीर खुसरो से निराला, दुष्यंत के बाद की पीढ़ी और युवा पीढ़ी की ग़ज़लें इस संग्रह में हैं।

ग़ज़ल संग्रह 'अधूरा ही रहा मोहन' का लोकार्पण

नवसृजन साहित्यिक संस्था, रुड़की (उत्तराखण्ड) द्वारा प्रतिवर्ष किसी एक साहित्यकार को सृजन शिल्पी सम्मान दिया जाता है तथा इस वर्ष का यह सम्मान नक़द राशि सहित दिल्ली से पधारे सुप्रसिद्ध शायर श्री दीक्षित दनकौरी को दिया गया।

'दुष्यन्त कुमार : स्मरण एवं विमर्श' का लोकार्पण

अपने वक्तव्य में पुस्तक के संपादक हरेराम समीप जी ने हिंदी के चर्चित कवि स्वप्निल श्रीवास्तव के एक कथन का उल्लेख किया, जो दुष्यन्त की महानता को प्रकट करता है। स्वप्निल श्रीवास्तव जी के अनुसार 'दुष्यन्त आज के सबसे ज़्यादा याद किये जाने वाले कवि हैं'।