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नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

रमेश गौतम के नवगीत

रमेश गौतम के नवगीत

फिर घिनौने
क्षण हमें घेरे हुए
एक गौरेय्या गगन कैसे छुए

बैठे हुए हैं दिन अभागे

एक
चुप्पी बाँध कर
बैठे हुए हैं दिन अभागे

देह नोंची
जा रही है
तितलियों की मधुवनों में
व्यस्त रखवाले सभी
अपने निहित प्रयोजनों में
कुछ
कहें तो तंत्र भी
आँखें तरेरे तोप दागे

काँपती-सी
रातरानी
किस तरह सपने गढ़ेगी
चाँदनी कब तक अकेली
इन अँधेरों से लड़ेगी
साँस ले
कैसे हवा
नीले ज़हर के आज आगे

लूट लेते
दिन दहाड़े
जो नवोदित किरण का तन
पैरवी में उन पिशाचों
की खड़े हैं देवता-गन
डबडबाती
आँख की
दारुण व्यथा पर कौन जागे!

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फिर हमारी शर्म से गर्दन झुकी

फिर
सुनहरी पाँखुरी नोची गई
फिर हमारी शर्म से गर्दन झुकी

फिर हताहत
देवियों की देह है
फिर व्यवस्था पर बहुत संदेह है
फिर खड़ी
संवेदना चौराहे पर
फिर नगर की व्यस्त दिनचर्या रुकी

फिर घिनौने
क्षण हमें घेरे हुए
एक गौरेय्या गगन कैसे छुए
लौटती
जब तक नहीं फिर नीड़ में
बंद रहती है हृदय की धुकधुकी

फिर सिसकती
एक उजली सभ्यता
फिर सभा में मूक बैठे देवता
मर गई है
फिर हमारी आत्मा
एक शवयात्रा गली से जा चुकी

फिर हुई है
बेअसर कड़वी दवा
अब बहे कैसे यहाँ क्वाँरी हवा
कुछ करो
पंचायतों में सार्थक
छोड़कर बातें पुरानी बेतुकी

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वसंत जमशेदपुरी

16 October 2025

अप्रतिम गीत

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रचनाकार परिचय

रमेश गौतम

ईमेल : rameshg78b@gmail.com

निवास : बरेली (उ०प्र०)

जन्मतिथि- 28 सितम्बर, 1948
जन्मस्थान- पीलीभीत (उ०प्र०)
शिक्षा- एम० ए० (हिन्दी साहित्य)
संप्रति- कला अध्यापक के पद से सेवानिवृत्त
प्रकाशन- देशभर की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में नवगीत, लघुकथा, बाल कविताएँ, लेख, समीक्षा आदि प्रकाशित।
पंजाबी व गुजराती में लघुकथाओं का अनुवाद प्रकाशित।
निवास- रंगभूमि, 78- बी, संजय नगर, बरेली (उ०प्र०)- 243005
मोबाइल- 8394984865