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पुष्करराय जोषी के हाइकु

पुष्करराय जोषी के हाइकु

स्वागत किया 
व्हेल ने मछली का
मुँह फाड़ के

मेरे भीतर
करते खींचा-तानी
श्वान-शृगाल।


जिन्न एआई
पल-पल रचता
दुर्ग हवाई।


धुआँ ओढ़के
कौआ-सा बन गया
गोरा शहर।


दब जाती है
पहियों के शोर में
सच की चीख़।


कैसा पथिक?
पवन को पूछता
अपना पता।

******


फूल की भांति
खिलते हैं सपने 
किंतु कांटों के।

******


बंदरों जैसी
मानव-मूर्खता से
प्रभु चिंता में।


स्वागत किया 
व्हेल ने मछली का
मुँह फाड़ के।


कहीं भी आग
मेरी साँसों में होते
सपने ख़ाक।


फटा बादल
मेरे भीतर बाढ़
बह रहा मैं।

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रचनाकार परिचय

पुष्करराय जोशी

ईमेल : joshipushkarray@gmail.com

निवास : राजकोट (गुजरात)

जन्मतिथि- 10 मार्च, 1955
जन्मस्थान- राजुला (गुजरात)
शिक्षा- बी.कॉम, बी. एड
संप्रति- सेवानिवृत्ति पश्चात पूर्णत: लेखन
प्रकाशित कृतियाँ- दिव्य घोष, भीतर जंतर वागे, प्रेम पारावार, आठे पहोर आनंद, गुड मोर्निग तान्का, जाफ़राबाद ना खारवा ना लग्न गीतो
तथा कस्तूरी मृग (हिन्दी)
पता- 479, गुजरात हाउसिंग बोर्ड, कणकोट पाटिया, कारागार रोड, राजकोट (गुजरात)- 360005