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राजपाल सिंह गुलिया के दोहे

राजपाल सिंह गुलिया के दोहे

बड़ा बहुत संसार में, भूख नाम का रोग।
मिटा सका जिसको यहाँ, कहो कौनसा योग।।

सबका मालिक एक है, जिसके रूप अनेक।
भटकें हम जब राह से, देता वही विवेक।।

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उन दोनों के बीच में, जबसे हुआ करार।
ख़तरे में तब आ गया, जग का शिष्टाचार।।

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बात सीख संघर्ष की, बैठ दीप के साथ।
अंधकार से जो करे, तनहा दो-दो हाथ।।

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बड़ा बहुत संसार में, भूख नाम का रोग।
मिटा सका जिसको यहाँ, कहो कौनसा योग।।

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आँखों देखे सत्य को, लिया झूठ था मान।
सुनी-सुनाई बात जब, बोली सीना तान।।

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अकर्मण्यता ने किया, पैदा अजब फितूर।
पाँवों को लगती रही, हरदम दिल्ली दूर।।

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धर्म जाति भी हैं बहुत, भाषा यहाँ अनेक।
बातें करके देखिए, भाव-रूप है एक।।

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डटे सिपाही लाम पर, खेतों जुटा किसान।
त्याग-समर्पण भाव से, बनता देश महान।।

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मनमाने की बात तो, पूछो नहीं जनाब।
फिरता बूढ़ा प्रेम भी, लेकर नया गुलाब।।

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कैसे हँसते-नाचते, दबा जिया की चीख।
ये सब होता किस तरह, तू किन्नर से सीख।।

2 Total Review

वसंत जमशेदपुरी

23 October 2025

शानदार दोहे

N

Narender Kumar

09 October 2025

सभी दोहे बहुत अच्छे हैं जिनको बार-बार पढ़ने का मन करता है।

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रचनाकार परिचय

राजपाल सिंह गुलिया

ईमेल : rajpalgulia1964@gmail.com

निवास : झज्जर (हरियाणा)

जन्मतिथि- 27 दिसम्बर, 1964
शिक्षा- स्नातक, शिक्षण में डिप्लोमा
संप्रति- सेना शिक्षा कोर में शिक्षा अनुदेशक व हरियाणा शिक्षा विभाग में अध्यापक पद से सेवानिवृत्ति के पश्चात अब स्वतंत्र लेखन
विधाएँ- दोहा, कुण्डलिया, ग़ज़ल, नवगीत, बालगीत व मुक्तक
प्रकाशन- उठने लगे सवाल, देगा कौन जवाब (दोहा संग्रह), इतनी-सी फ़रियाद (कुण्डलिया संग्रह), निर्मल देश हमारा (बाल कविता संग्रह), चन्दन वन (गीत-नवगीत संग्रह)
सम्पादन- सरस्वती सुमन के 'कुण्डलिया विशेषांक' का अतिथि सम्पादन
गाँव- जाहिदपुर, डाकखाना- ऊँटलौधा, तहसील व ज़िला- झज्जर (हरियाणा)- 124103
मोबाइल- 9416272973