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जीवन के विविध पहलुओं पर गहराई से सोचने के लिए मजबूर करता संग्रह- रामनाथ यादव 'बेख़बर'

जीवन के विविध पहलुओं पर गहराई से सोचने के लिए मजबूर करता संग्रह- रामनाथ यादव 'बेख़बर'

प्रस्तुत संग्रह का शायर अपने समय और समाज के तमाम सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील और जागरूक है और अपनी ग़ज़लों में इन मुद्दों को बेबाकी से उठाता है। उनकी ग़ज़लें सामाजिक न्याय, स्वतंत्रता, समानता और मानवता की भावना को प्रोत्साहित करती हैं।

समकालीन हिंदी ग़ज़ल के प्रतिभाशाली युवा ग़ज़लकार अभिषेक सिंह ने अपनी अद्वितीय लेखन क्षमता से एक व्यापक पाठक वर्ग को मोहित किया है और आज वे इस क्षेत्र के श्रेष्ठतम हस्ताक्षरों में से एक माने जाते हैं। 'वीथियों के बीच' अभिषेक सिंह का प्रथम ग़ज़ल-संग्रह है, जिसे उन्होंने अपने अध्यापक श्री सामंती राय और साथी ग़ज़लकार श्री के०पी० अनमोल को सादर समर्पित किया है। प्रस्तुत संग्रह में कुल 110 ग़ज़लें संग्रहित हैं। अभिषेक सिंह जब ग़ज़ल कहते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे कोई कुशल चित्रकार अपनी तूलिका से कोरे कागज़ पर नवीन चित्र रच रहा हो। उनकी ग़ज़लों में जीवन के विभिन्न रंग और भावनाएँ इतनी सजीवता से उकेरी गई हैं कि वे पाठकों के अंतर्मन को छू लेती हैं। उनकी ग़ज़लों में एक अनोखी संवेदनशीलता और भावनात्मक गहराई है, जो हमें बरबस ही देर तक गुदगुदाती है और हमें जीवन के विविध पहलुओं पर गहराई से सोचने के लिए मजबूर करती है।

प्रस्तुत संग्रह का शायर अपने समय और समाज के तमाम सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील और जागरूक है और अपनी ग़ज़लों में इन मुद्दों को बेबाकी से उठाता है। उनकी ग़ज़लें सामाजिक न्याय, स्वतंत्रता, समानता और मानवता की भावना को प्रोत्साहित करती हैं। उनकी ग़ज़लों में सामाजिक विद्रूपताओं, राजनीतिक उथल-पुथल और मानव जीवन की जटिलताओं का मार्मिक चित्रण स्पष्ट रूप से देखने को मिलता हैं। चंद शेर देखें-

महँगाई घटती है बस ऐलानों में
तेल, नमक का दाम कहाँ कम होता है

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लोग जो उतरे अभी हैं चमचमाती कार से
भूख पर चर्चा करेंगे बैठकर विस्तार से

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बाढ़ से पहले बनेंगे काग़ज़ों पर पुल नये
और ज़मीं पे योजना को रौंद डाला जाएगा

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चुनावों का जहाँ मौसम रहेगा
वहाँ कर्फ्यू में थोड़ी ढील होगी

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ऐसे टूटा होरी मालिक के आगे
डॉलर के आगे ज्यों रुपया टूट गया

इनकी ग़ज़लों में संवेदनशीलता की एक गहरी धारा निरन्तर बहती रहती है, जो प्रेम- प्रकृति और परिवेश के विविध पहलुओं को एक अद्वितीय रंगत देती है। बतौर उदाहरण चंद शेर देखें-

चलती है रात जब कभी हिलती है चाँदनी
शायद ये चाँद रात के झुमके से है बँधा

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उनकी खनक को रखना सदा ही संभालकर
उठती है प्रेम की सदा जिन चूड़ियों के बीच

कतिपय शेरों में नूतन बिंबों और प्रतीकों का खुलकर प्रयोग हुआ है, जिनके कारण उनमें अद्भुत निखार आ गया है। ये बिंब और प्रतीक न केवल उनके शेरों को सौंदर्य और अर्थ प्रदान करते हैं, अपितु पाठकों को नौजवान शायर के दृष्टिकोण से भी अवगत कराते हैं।

अभिषेक की ग़ज़लों की भाषा सरल और आम बोलचाल की भाषा है, जिसमें उर्दू के शब्दों का प्रयोग सीमित है और वह भी इतना सहज है कि अर्थ समझने के लिए शब्दकोष की ज़रूरत नहीं पड़ती। इसके अलावा, कहीं-कहीं अंग्रेजी के शब्दों का भी सहज प्रयोग हुआ है, जो उनकी रचनाओं को और अधिक समकालीन बनाता है। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि अभिषेक की ग़जलें अपनी रचनात्मक विशिष्टता और परिपक्व विचारों के साथ नए आयामों की खोज में लगी हुई हैं।

ग़ज़ल प्रेमियों से निवेदन है कि आप इस किताब को एक बार जरूर पढ़ें, यह पूरी तरह से पैसा वसूल किताब है। इसकी अद्वितीय शैली और गहन विचार आपको आकर्षित करेंगे। यह संग्रह न केवल आपको ग़ज़ल के नए आयामों से परिचित कराएगा बल्कि आपकी साहित्यिक समझ को और अधिक पुष्पित और पल्लवित करेगा।

 

 

समीक्ष्य कृति- वीथियों के बीच
ग़ज़लकार- अभिषेक कुमार सिंह
प्रकाशक- लिटिल बर्ड पब्लिकेशंस, नई दिल्ली
पेज- 128
मूल्य- 250 रुपए

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रचनाकार परिचय

राम नाथ यादव 'बेख़बर'

ईमेल : ramnath41@gmail.com

निवास : हुबली(पश्चिम बंगाल)

जन्मतिथि- 08 नवंबर, 1978
जन्म-स्थान- चापदानी, हुगली, पश्चिम बंगाल
शिक्षा- एम.ए.(हिन्दी),बी.एड.
संप्रति-सहायक-शिक्षक (काशीपुर श्री सनातन धर्म विद्यालय,कोलकाता
प्रकाशन -1- 'भले हूँ बेख़बर लेकिन' (ग़ज़ल संग्रह) 2- 'ख़्वाहिश' (ग़ज़ल संग्रह) 3- 'सूरज ढलने तक' (काव्य-संग्रह) 4-'छतरी भर छाँव' (दोहा - संग्रह) 5- संपादन- प्रतिरोध की ग़ज़लें 6- संकलन- ग़ज़ल पंच शतक आधी आबादी की ग़ज़लें ग़ज़ल त्रयोदश-1 से लेकर 10 खण्ड तक दर्जनों साझा संकलनों में ग़ज़लें संकलित
प्रसारण- ताजा टी.वी.,एम टी.वी.,आज तक और आकाशवाणी आदि पर रचना पाठ
सम्मान/ पुरस्कार- 1-आदर्श शिक्षक सम्मान (2018,कोलकाता) 2-आदर्श शिक्षा रत्न(2019,मथुरा) 3- रचनाकार विशिष्ट सम्मान(2022,कोलकाता)
संपर्क- 8/1,एस. एम.बाई लेन, बाँसबगान,चापदानी। पोस्ट-वैद्यबाटी, जिला-हुगली पिन-712222(पश्चिम बंगाल)
मोबाइल- 7980630154