Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

जलवायु और युद्ध: मानवता के सामने दोहरी चुनौती- अलका मिश्रा

जलवायु और युद्ध: मानवता के सामने दोहरी चुनौती- अलका मिश्रा

आज की दुनिया एक ऐसे संकट के मुहाने पर खड़ी है, जहाँ दो सबसे भयावह संकट—जलवायु परिवर्तन और युद्ध—मानव सभ्यता को गहराई से झकझोर रहे हैं। ये दोनों समस्याएँ केवल सीमाओं या देशों की नहीं हैं, बल्कि पूरी मानवता के अस्तित्व से जुड़ी हुई हैं।

आज की दुनिया एक ऐसे संकट के मुहाने पर खड़ी है, जहाँ दो सबसे भयावह संकट—जलवायु परिवर्तन और युद्ध—मानव सभ्यता को गहराई से झकझोर रहे हैं। ये दोनों समस्याएँ केवल सीमाओं या देशों की नहीं हैं, बल्कि पूरी मानवता के अस्तित्व से जुड़ी हुई हैं।
पृथ्वी लगातार गर्म हो रही है। हाल ही में 2024 और 2025 के प्रारम्भ में, विश्व के कई हिस्सों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी दर्ज की गई। हिमालय से लेकर यूरोप के जंगलों तक, बर्फ़ पिघल रही है, समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है, और प्राकृतिक आपदाएँ जैसे बाढ़, सूखा, तूफ़ान और जंगलों की आग आम होती जा रही हैं। ये सिर्फ़ मौसम की घटनाएँ नहीं हैं—ये प्रकृति का चेतावनी सन्देश हैं।
विश्व के वैज्ञानिक और पर्यावरणविद वर्षों से कह रहे हैं कि यदि ग्लोबल टेम्परेचर को 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ने दिया गया, तो इसका परिणाम विनाशकारी होगा। परन्तु, बड़े-बड़े देशों की राजनीतिक इच्छाशक्ति और कॉर्पोरेट लालच इस दिशा में ठोस कदम उठाने में बाधा बन रही है।
एक तरफ प्रकृति विद्रोह पर है, तो दूसरी ओर मनुष्य स्वयं विनाश का बीज बो रहा है। यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध, जो अब वर्षों से जारी है, ने लाखों लोगों को बेघर कर दिया और वैश्विक खाद्य आपूर्ति को संकट में डाल दिया। इज़राइल और गाज़ा का संघर्ष हर दिन निर्दोष लोगों की जान ले रहा है। बीते दिनों ईरान और इज़राइल के युद्ध के भी दुष्परिणाम हमने देखे।
इन युद्धों में न केवल सैनिक, बल्कि सबसे अधिक नुकसान आम नागरिकों को होता है। बच्चों की शिक्षा, महिलाओं की सुरक्षा, और पूरे समाज की संरचना तहस-नहस हो जाती है। इसके साथ ही पर्यावरण पर भी युद्ध का असर पड़ता है—बमों से जलवायु प्रदूषित होती है, जंगल जलते हैं, और ज़हरीले रसायन मिट्टी और जल को दूषित कर देते हैं।
जलवायु परिवर्तन और युद्ध दोनों ही मानव निर्मित संकट हैं। ये दर्शाते हैं कि हम विज्ञान, तकनीक और संसाधनों के होते हुए भी शांति और संतुलन नहीं बना पाए। इस समय ज़रूरत है वैश्विक नेतृत्व, सहयोग और करुणा की।
संयुक्त राष्ट्र, वैश्विक संस्थाएँ और बड़ी शक्तियाँ यदि अब भी केवल बयानबाज़ी में उलझी रहीं, तो आने वाली पीढ़ियों को हम एक असुरक्षित, विषैली और भयभीत दुनिया सौंपेंगे।

आइए अब उन बिंदुओं पर नज़र डाल लें जो इन समस्याओं से निबटने के लिए मेरी समझ में आवश्यक हैं। 

• जलवायु के मोर्चे पर हमें हरित ऊर्जा, पुनर्चक्रण, और सतत जीवनशैली को अपनाना होगा।
• युद्धों को रोकने के लिए संवाद, राजनयिक हस्तक्षेप और मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देनी होगी।
• शिक्षा और जागरूकता के ज़रिए जनमानस को तैयार करना होगा कि यह केवल सरकारों का नहीं, हम सबका उत्तरदायित्व है।

तो आइए आज ही से यह प्रण लें कि हमारी सामर्थ्य भर हम योदान देंगे।  क्योंकि-
"जब प्रकृति रोती है और बंदूकें गरजती हैं, तब मानवता की पुकार कहीं खो जाती है। अब समय है उसे फिर से सुनने का।"

3 Total Review
N

Neel mani

14 July 2025

मैं अपनी बात कार्टून के द्वारा कहूंगी - https://www.facebook.com/share/p/1C7TMAJnio/

S

Sudershan ratnakar

12 July 2025

जलवायु परिवर्तन और युद्ध दोनों ही मानव के लिए घातक हैं। आपने दोनों पर सटीक लिखा है। ।आज जागरूकता की आवश्यकता है।

कैलाश बाजपेयी

11 July 2025

जलवायु परिवर्तन और क ई देशों के बीच चल रहे युद्ध मानव जीवन के लिए खतरे की घंटी बजा रहे हैं।आपकी चिंता स्वाभाविक है।

Leave Your Review Here

रचनाकार परिचय

अलका मिश्रा

ईमेल : alkaarjit27@gmail.com

निवास : कानपुर (उत्तर प्रदेश)

जन्मतिथि-27 जुलाई 1970 
जन्मस्थान-कानपुर (उ० प्र०)
शिक्षा- एम० ए०, एम० फिल० (मनोविज्ञान) तथा विशेष शिक्षा में डिप्लोमा।
सम्प्रति- प्रकाशक ( इरा पब्लिशर्स), काउंसलर एवं कंसलटेंट (संकल्प स्पेशल स्कूल), स्वतंत्र लेखन तथा समाज सेवा
विशेष- सचिव, ख़्वाहिश फ़ाउण्डेशन 
लेखन विधा- ग़ज़ल, नज़्म, गीत, दोहा, क्षणिका, आलेख 
प्रकाशन- बला है इश्क़ (ग़ज़ल संग्रह) प्रकाशित
101 महिला ग़ज़लकार, हाइकू व्योम (समवेत संकलन), 'बिन्दु में सिन्धु' (समवेत क्षणिका संकलन), आधुनिक दोहे, कानपुर के कवि (समवेत संकलन) के अलावा देश भर की विभिन्न साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं यथा- अभिनव प्रयास, अनन्तिम, गीत गुंजन, अर्बाबे कलाम, इमकान आदि में रचनाएँ प्रकाशित।
रेख़्ता, कविता कोष के अलावा अन्य कई प्रतिष्ठित वेब पत्रिकाओं हस्ताक्षर, पुरवाई, अनुभूति आदि में रचनाएँ प्रकाशित।
सम्पादन- हिज्र-ओ-विसाल (साझा शेरी मजमुआ), इरा मासिक वेब पत्रिका 
प्रसारण/काव्य-पाठ- डी डी उत्तर प्रदेश, के टी वी, न्यूज 18 आदि टी वी चैनलों पर काव्य-पाठ। रेखता सहित देश के प्रतिष्ठित काव्य मंचों पर काव्य-पाठ। 
सम्मान-
साहित्य संगम (साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक) संस्था तिरोड़ी, बालाघाट मध्य प्रदेश द्वारा साहित्य शशि सम्मान, 2014 
विकासिका (साहित्यिक सामजिक एवं सांस्कृतिक) संस्था कानपुर द्वारा ग़ज़ल को सम्मान, 2014
संत रविदास सेवा समिति, अर्मापुर एस्टेट द्वारा संत रवि दास रत्न, 2015
अजय कपूर फैंस एसोसिएशन द्वारा कविवर सुमन दुबे 2015
काव्यायन साहित्यिक संस्था द्वारा सम्मानित, 2015
तेजस्विनी सम्मान, आगमन साहित्य संस्था, दिल्ली, 2015
अदब की महफ़िल द्वारा महिला दिवस पर सम्मानित, इंदौर, 2018, 2019 एवं 2020
उड़ान साहित्यिक संस्था द्वारा 2018, 2019, 2021 एवं 2023 में सम्मानित
संपर्क- एच-2/39, कृष्णापुरम
कानपुर-208007 (उत्तर प्रदेश) 
 
मोबाइल- 8574722458