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नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

रमेश कुमार भद्रावले की क्षणिकाएँ

रमेश कुमार भद्रावले की क्षणिकाएँ

हमने
मिट्टी के चूल्हे की
ताक़त भी
देखी है,
परिवार के पचास
लोगों की रोटियाँ
सुबह-शाम सेंकी है!

 

महीने, साल, शताब्दियों को
जन्म देते-देते
युग बूढ़ा हो गया,
बूढ़ी सदी के
नये साल में
आदमी
कितना जवान हो गया!


हमने
मिट्टी के चूल्हे की
ताक़त भी
देखी है,
परिवार के पचास
लोगों की रोटियाँ
सुबह-शाम सेंकी है!


हर साल
अपनी बुराई एक
होली की तरह
जला दो,
घोलकर रँग में
अपनी अच्छाई एक
आदमी को
लगा दो!


जिसके दम पर
स्वच्छता अभियान में
इतनी छवि बन गयी,
इनाम से वंचित
आदमी नहीं
बेचारी झाड़ू रह गयी!


लहू के कतरों से
जो बीज
शहीद बो गये,
आज़ादी की फ़सल
चिड़िया नहीं
नेता चुग गये!


शिकार
विज्ञापनों का होकर
आदमी अब यों बदलता है,
आज बर्तन में कम
दाँत माँजने में
ज़्यादा समय लगता है!

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रचनाकार परिचय

रमेश कुमार भद्रावले

ईमेल :

निवास : हरदा(मध्य प्रदेश)

शिक्षा- बी.कॉम., एम.ए. (हिन्दी साहित्य), शब्द(प्राणायाम), 
संप्रति- पूर्व मैनेजर, देना बैंक, डिस्ट्रिक्ट चेयर पर्सन लायन क्लब हरदा अम्बर। 
सम्पर्क- गणेश चौक, गणेश मंदिर के सामने हरदा-  461331 (मध्य प्रदेश)