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किसी ने कुछ कर दिया है- अख़्तर अली

किसी ने कुछ कर दिया है- अख़्तर अली

लड़का बिगड़ जाये, लड़की हाथ से निकल जाये, आदमी पत्ते और सट्टे में सब कुछ गँवा दें तो पीड़ित पक्ष अपनी सफ़ाई में यह कह सकते हैं कि हमारे परिवार को किसी ने कुछ कर दिया है। यह ज़बरदस्त जादू–टोना है जो हम को उभरने नहीं दे रहा है।

लड़का बिगड़ जाये, लड़की हाथ से निकल जाये, आदमी पत्ते और सट्टे में सब कुछ गँवा दें तो पीड़ित पक्ष अपनी सफ़ाई में यह कह सकते हैं कि हमारे परिवार को किसी ने कुछ कर दिया है। यह ज़बरदस्त जादू–टोना है जो हम को उभरने नहीं दे रहा है। इसने हमें बर्बाद कर दिया है।
इस जवाब का कोई तोड़ नहीं है। यह पूरी तरह से सुरक्षित जवाब है। इसमें जो “किसी ने" शब्द है यह रहस्य का दायरा बढ़ाता है। इसमें आदमी जिसको चाहे फँसा सकता है। बदला लेने का यह अच्छा मौक़ा होता है। इस वक़्त उसके हाथ में ऐसा हथियार है जिसका वार कभी चूकता नहीं। बर्बाद आदमी जब ऐसा बयान देता है तब उसके संपर्क के लोग सहम जाते हैं।
लुटा पिटा आदमी रोज़ नई कहानी गढ़ता है। उसकी कहानी का हर पात्र डरावना और संदिग्ध होता है। इससे पूछो कि यह जो तुम्हारा बयान है कि “किसी ने कुछ कर दिया है" तो "इस किसी ने" से तुम्हारा आशय क्या है ? तुम्हे किस पर शक है ? इस बात पर वह अपने भरपूर आत्म विश्वास का प्रदर्शन करते हुए कहता है– मेरे को सब मालूम है कि ये सब कौन कर रहा है। समय आने पर उसको मैं बताऊँगा। अभी उसको जो करना है कर ले फिर मैं देखूँगा।
पंचायत करने वालों को इस जवाब में मज़ा नहीं आता वे तो किसी आदमी का नाम सुनना चाहते हैं। ये लोग अब उसे थोड़ा और कुरेदते है। इस बार वह थोड़ा खुलता है और कहता है– वह आस–पास का ही आदमी है। उसके सिर पर बाल, चेहरे पर आँख और हाथ में उँगलियाँ हैं।
पंचायती आदमी कुछ और क्लू चाहता है तो बताया जाता है– वह अनाज खाता है, पानी पीता है, कपड़े पहनता हैं। आस–पास रहने वाले लोग डर जाते हैं कि यह न जाने कब किसका नाम ले ले। यह कहावत बस यूँ ही नहीं जन्मी है कि हम तो डूबेगे सनम तुम को भी ले डूबेंगे।
घर में कलह मची है। सास-बहू और बाप – बेटे में रोज़ तू तू – मैं मैं होती है। पड़ोसी रोज़ की किच किच सुनते हैं। बाद में उन्हें बताया जाता हैं कि हमारे घर को किसी ने बाँध दिया है। हमारे दुश्मन बहुत है। लोगों से हमारी तरक़्क़ी देखी नही जा रही है। सुनने वाला परेशान है कि ये किस तरक़्क़ी की बात कर रहे हैं ? जो तरक़्क़ी है ही नहीं उसे कोई देखे भी तो कैसे देखे ?
बर्बाद घर की औरत अपनी सहेलियों को बताती है मेरे घर पर कोई डायन ने कब्जा कर लिया है। रोज़ रात बारह बजे के बाद वह किचन में आती है तब खटर पटर की आवाज़ साफ़ सुनाई देती है। सुबह बर्तन बिखरे हुए मिलते हैं। एक रात जैसे ही किचन में से आवाज़े आ रही थी मैं हिम्मत कर किचन में गई तो मेरे को देखते ही चूहे का रूप धारण कर ली और वहाँ से निकल गई।
जब नींबू दस के पाँच थे तब ये लोग रोज़ नींबू और मिर्ची लेकर मोहल्ले में निकल जाते थे और घर घर जाकर दिखाते थे कि देखो दुश्मन ने ये नींबू मिर्ची में मंतर फूक का मेरे दरवाज़े के सामने डाल दिया है। जब नींबू दस के दो हुए तब इस सिलसिले में थोड़ी कमी आई। बीच में जब कुछ दिनों के लिये नींबू पंद्रह रूपये का एक हो गया था तब जादू टोना करने वाले गायब हो गये थे और झाड़ फूक करने वाले बाबा बेरोजगार। मँहगाई का जादू अन्य सभी जादू को कमज़ोर देता है।
जब चारो तरफ़ ख़ामोशी और सन्नाटा होता है तब इन लोगों को डरावनी आवाज़े सुनाई देती है। जब दूर दूर तक कोई नज़र नही आता तब इनके कोई साया बाजू से निकलता महसूस होता, किसी पेड़ पर कोई उल्टा लटका नज़र आता, किसी औरत के रोने की दर्द भरी आवाज़ सुनाई देती तो कभी सफ़ेद साड़ी पहनी कोई सुंदर औरत खिड़की से झाकती दिखाई देती है जो इशारे से बुलाती है।
इधर भूत अपनी हो रही बदनामी से अलग टेंशन में है। इन्हें ऐसे गुनाह में फँसाया जा रहा है जो उन्होंने किया नहीं। उन्होंने अपनी आपातकालीन मीटिंग बुलवाई और भूतों को आगाह किया कि जब से आदमियों का एक तबका राक्षस हुआ है भूत का भविष्य अंधकारमय हो गया है। आप लोग अपना ध्यान रखे और अपने बच्चों को आदमी से दूर रखने की कोशिश करें।
हुस्न का जादू, इश्क़ का जादू, आवाज़ का जादू, पैसों का जादू, लोकतंत्र का जादू इस श्रंखला का यह टोना वाला जादू है। यह काल्पनिक जादू है जो होता नहीं है बस घोषित किया जाता है। यह ऐसा जादू है जिसका कोई जादूगर नही है। बिना मंत्र के ही यह प्रभावशील हो जाता हैँ इस न होने वाले जादू पर विश्वास करने वालों की कमी नही है एक ढूँढो हज़ार मिलते हैं। जादुई दुनिया का यह सब से बड़ा जादुई आँकड़ा है।
जादू – टोना की बात करने वाला जानता है मैं झूठ बोल रहा हूँ और सुनने वाला भी जानता है मैं झूठ सुन रहा हूँ। फिर भी बोलने वाला इसे भोगे हुए यथार्थ की तरह बोलता है और सुनने वाला सत्य घटना की तरह सुनता है। हिंदी साहित्य की तरह इससे न कोई सहमत होता है और न ही अस्वीकार करता है। न प्रशंसा होती है न निंदा। बस सब मज़े लेते है और हाशिये पर डाल देते हैं।
इस तरह की बातों से तरह तरह की बात निकलती है। ऐसी ही एक बात यह सामने आई है कि पुल के गिर जाने, सड़क के उखड़ जाने की जाँच कराने की क्या ज़रूरत है सरकार को कह देना चाहिये कि इसके पीछे भूत–प्रेत और डायन का हाथ है। किसी स्व. मंत्री की भटकती आत्मा पुल को खड़ा रहने नही दे रही है। जाँच रिपोर्ट पर कोई विश्वास नही करेगा लेकिन भूत–प्रेत वाले एंगल पर सब यकीन कर लेंगे।

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रचनाकार परिचय

अख़्तर अली

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निवास : रायपुर(छत्तीसगढ़)

सम्पर्क- निकट मेडी हेल्थ हाँस्पिटल 
रायपुर ( छत्तीसगढ़ ) 492010
मोबाइल- 9826126781